महिला एवं बाल विकास मंत्री से शिकायत: रामगढ़ में सेक्टर सुपरवाइजर पर 1500 रुपये वसूली व गंभीर अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज ?
📝 खबर (निलेश सोनी):
रामगढ़ क्षेत्र में पदस्थ सेक्टर सुपरवाइजर पर विभागीय नियमों की अनदेखी और कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
मामले ने प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, वहीं जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नियमानुसार सेक्टर सुपरवाइजर को अपने कार्यक्षेत्र में निवास कर आंगनबाड़ी केंद्रों की सतत निगरानी एवं संचालन सुनिश्चित करना होता है,
लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा क्षेत्र में निवास नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है।
इसका सीधा असर आंगनबाड़ी सेवाओं के संचालन पर पड़ रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से ऑनलाइन जानकारी अपडेट करने के नाम पर प्रति कार्यकर्ता लगभग 1500 रुपये की कथित वसूली की जा रही है। यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं,
तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में गंभीर मामला माना जाएगा।
इसके अतिरिक्त, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय की कमी, बच्चों के पोषण कार्यक्रमों में लापरवाही तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव जैसे कई मुद्दे भी सामने आए हैं।
इससे शासकीय योजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही लाभार्थी बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भी इस स्थिति को लेकर असंतोष व्याप्त है, जिससे जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही, दोषी पाए जाने पर संबंधित सेक्टर सुपरवाइजर के विरुद्ध विभागीय नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो सरकार की महत्वाकांक्षी महिला एवं बाल विकास योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता और तत्परता दिखाते हुए ठोस कार्रवाई करता है।