*आर्मी ट्रेनिंग कमांड का अलंकरण समारोह 2026 शिमला में संपन्न*
मनोज शर्मा ,चंडीगढ़ । आर्मी ट्रेनिंग कमांड का अलंकरण समारोह 2026, 24 मार्च 2026 को शिमला स्थित डैन्फे ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता Lt Gen Devendra Sharma, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने की। इस अवसर पर प्रशिक्षण वर्ष 2025-26 के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले संस्थानों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
प्रतिष्ठित जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ आर्मी ट्रेनिंग कमांड यूनिट प्रशस्ति चार श्रेणी ‘ए’ प्रशिक्षण संस्थानों—आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल तथा राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज—को प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दो संबद्ध इकाइयों—269 इंजीनियर रेजिमेंट और 665 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)—को भी यह सम्मान मिला। वित्तीय उत्कृष्टता पुरस्कार कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल, जूनियर लीडर अकादमी तथा कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग को प्रदान किए गए। डिजिटाइजेशन एवं ऑटोमेशन उत्कृष्टता पुरस्कार मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल को दिया गया। पैन-इंडियन आर्मी स्तर की प्रतियोगिता में चयनित नवप्रवर्तकों को उनकी नवाचार उपलब्धियों के लिए 11 तकनीकी उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त 16 व्यक्तियों को विशिष्ट सेवा के लिए जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ स्पॉट प्रशंसा पत्र भी प्रदान किए गए।
समारोह को संबोधित करते हुए आर्मी कमांडर ने कहा कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड के पुरस्कार विजेता इसकी उपलब्धियों के केंद्र में हैं। उन्होंने ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ के पाँच स्तंभों के अंतर्गत आर्मी ट्रेनिंग कमांड की 57 पहलों का उल्लेख किया तथा हालिया अभियानों, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है, से मिले अनुभवों के आधार पर कहा कि ड्रोन अब युद्धक्षेत्र की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड के ड्रोन प्रशिक्षण ढांचे के माध्यम से अब तक 50,000 से अधिक कर्मियों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आर्मी कमांडर ने यह भी बताया कि 15 संस्थान वर्ष 2030 तक 33 विशिष्ट तकनीकों को अपनाने हेतु ‘सेंटर ऑफ एक्सपर्टीज’ के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने ‘विदुर वक्ता’ (रेड टीमिंग) पहल के 2027 तक सेना-स्तर पर संस्थानीकरण, चतुर्वार्षिक प्रशिक्षण निदेश (2025-2029) तथा पदोन्नति एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के ऑनलाइन माध्यम में परिवर्तन पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने आर्मी ट्रेनिंग कमांड की लैंगिक समानता एवं सैन्य कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए आर्मी कमांडर ने उनके बौद्धिक योगदान, समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने आर्मी ट्रेनिंग कमांड के सभी सदस्यों से निरंतर सीखने, स्वयं को अनुकूलित करने और उभरती तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया, जो आदर्श वाक्य ‘युद्ध कला वह सैन्य विज्ञान में उत्कृष्ट’ की भावना के अनुरूप है। उन्होंने ‘संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार (JAI)’ के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के प्रति आर्मी ट्रेनिंग कमांड की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।