Meerut: मेरठ में ग्रीन एनर्जी प्लांट, पूरी तरह हटेंगे कूड़े के पहाड़, गीले कचरे से बनेगी सीएनजी, जलेगा चूल्हा
मेरठ में ग्रीन एनर्जी प्लांट के जरिए गीले कचरे से सीएनजी बनाई जाएगी, जिससे कूड़े के पहाड़ खत्म होंगे और 20 हजार घरों को गैस आपूर्ति संभव होगी।मेरठ में कूड़ा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मल्टीफीड ग्रीन एनर्जी प्लांट के पूरी क्षमता में आने के बाद शहर के कूड़े के पहाड़ खत्म होने की उम्मीद है। इस प्लांट के जरिए गीले कचरे से गैस तैयार की जाएगी, जिससे हजारों घरों की जरूरत पूरी हो सकेगी।गीले कचरे से बनेगी गैस
प्लांट के तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह संयंत्र पूरी क्षमता में आने के बाद प्रतिदिन 40 टन गैस का उत्पादन करेगा। यह गैस चार सीएनजी पंपों या करीब 20 हजार घरों की एक दिन की जरूरत को पूरा कर सकती है। गैस बनाने के लिए गोबर के साथ-साथ घरों से निकलने वाला गीला कचरा, सड़े फल-सब्जियां और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। इससे कचरे के निस्तारण की समस्या का समाधान भी होगा।शहर से खत्म होंगे कूड़े के पहाड़
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के करीब 50 प्लांट शहर में स्थापित किए जाएं, तो मेरठ से कूड़े के बड़े-बड़े ढेर पूरी तरह समाप्त किए जा सकते हैं। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा।
खाद भी बनेगी, पर्यावरण को लाभ
गैस उत्पादन के बाद प्रतिदिन लगभग 100 टन ऑर्गेनिक खाद भी तैयार होगी, जिसका उपयोग खेतों में किया जाएगा। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, कचरे से निकलने वाली मीथेन गैस का उपयोग करने से पर्यावरण को भी फायदा होगा। यह गैस जब सीधे वातावरण में जाती है तो अधिक गर्मी बढ़ाती है, लेकिन उपयोग के बाद इसका प्रभाव काफी कम हो जाता है।
प्लांट की वर्तमान स्थिति
फिलहाल प्लांट में बड़े डाइजेस्टर में टेस्ट रन चल रहा है और अभी करीब 12 टन गैस का उत्पादन हो रहा है। आने वाले समय में यहां कुल 12 डाइजेस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और बढ़ेगी। पूरी क्षमता में आने के बाद यह प्लांट न केवल ऊर्जा उत्पादन में मदद करेगा, बल्कि शहर की तस्वीर भी बदल देगा।