शाहजहांपुर में शहीदों की प्रतिमाएं बुलडोजर से हटाए जाने पर बवाल, महापौर बोलीं— माफी के लायक नहीं कृत्य
शाहजहांपुर,
नगर निगम कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर रविवार देर रात अमर शहीदों की प्रतिमाओं को बुलडोजर से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। घटना से आक्रोशित महापौर अर्चना वर्मा सोमवार रात मौके पर पहुंचीं और नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इस कार्रवाई को “माफी के लायक नहीं” बताते हुए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
महापौर ने कहा कि जिन शहीदों ने देश को आजादी दिलाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उनके साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हृदय विदारक है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले सूचना दी जाती तो वह स्वयं मौके पर मौजूद रहकर प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ हटवातीं।
बिना जानकारी के कार्रवाई पर उठे सवाल
महापौर ने नगर आयुक्त से सवाल किया कि इतने महत्वपूर्ण कार्य से पहले कोई बैठक क्यों नहीं की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्य नगर निगम का था, ऐसे में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेना आवश्यक था। मौके पर मौजूद एक पार्षद ने भी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
बिस्मिल, अशफाक और रोशन सिंह की प्रतिमाएं हटाईं
नगर निगम तिराहे के पास स्थापित अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाओं को रात में हटाया गया। नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि तिराहे पर कम जगह होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती थी, इसलिए प्रतिमाओं को पीछे स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी।
40 लाख का ठेका, नई प्रतिमाएं नहीं आईं
सौंदर्याकरण कार्य के लिए फ्लाई इंफ्राटेक फर्म को करीब 40 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। हालांकि, नई प्रतिमाएं अभी तक नहीं आई थीं, इसके बावजूद पुरानी प्रतिमाओं को हटाने की जल्दबाजी पर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जांच में संबंधित फर्म की लापरवाही सामने आई है। साथ ही, हटाई गई प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक चूक उजागर हुई है।
महापौर ने मानी लापरवाही
महापौर अर्चना वर्मा ने स्वीकार किया कि पूरे मामले में लापरवाही हुई है। उन्होंने कहा कि पहले तय हुआ था कि नया कार्य पूरा होने के बाद ही प्रतिमाएं हटाई जाएंगी, लेकिन बाद में इस पर कोई समन्वय नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के कारण उनकी व्यस्तता रही, फिर भी नगर निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि कार्य की निगरानी करते।
‘सम्मान के साथ हटाते तो बेहतर होता’
महापौर ने कहा कि शहीदों की नगरी में इस तरह की कार्रवाई बेहद संवेदनशील होती है। उन्होंने दोहराया कि प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक हटाया जाना चाहिए था। दिन में और सभी की मौजूदगी में यह कार्य होता तो बेहतर संदेश जाता।
फिलहाल, नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।