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सीधी। मध्यप्रदेश शासन ने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा को सीधी जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया है।

सीधी जिले के नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा बैच 2013

सीधी। मध्यप्रदेश शासन ने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा को सीधी जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब जिले में प्रशासनिक साख, भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की गति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उनकी एंट्री को “सिस्टम सुधार” के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं विकास मिश्रा?

विकास मिश्रा मध्यप्रदेश कैडर के 2013 बैच के तेज-तर्रार और जमीनी अधिकारी माने जाते हैं। वे इससे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं और आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के आयुक्त भी रह चुके हैं। उन्हें डॉ. मोहन यादव का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है।

डिंडोरी मॉडल: काम जिसने बनाई पहचान

डिंडोरी कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल आज भी उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने:

सरकारी स्कूलों में “कौन बनेगा करोड़पति” की तर्ज पर क्विज प्रतियोगिता शुरू कराई

एक आदिवासी महिला के हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिखकर सीधे संवाद की मिसाल दी

एक छात्र को “एक दिन का कलेक्टर” बनाकर प्रशासन से जोड़ने का अनोखा प्रयोग किया

इन पहलों ने उन्हें “जनता का कलेक्टर” बना दिया।

सादगी की पहचान: ‘कलेक्टर’ नहीं, ‘लोकसेवक’

विकास मिश्रा ने अपनी सरकारी गाड़ी से “कलेक्टर” शब्द हटवाकर “लोकसेवक” लिखवाया था। यह सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि उनके काम करने के नजरिए का संदेश है—पद नहीं, सेवा प्राथमिकता है।

सीधी में क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?

सीधी जैसे संवेदनशील जिले में उनकी जिम्मेदारी आसान नहीं मानी जा रही। प्रमुख चुनौतियां:

🔸 प्रशासन की खोई हुई साख को वापस लाना

🔸 भ्रष्टाचार पर कड़ा नियंत्रण

🔸 जनसुनवाई को प्रभावी बनाना

🔸 रुके हुए विकास कार्यों में तेजी लाना

🔸 जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की खाई को खत्म करना

जनता की उम्मीदें क्या कहती हैं?

सीधी जिले की जनता को एक ऐसे अधिकारी की तलाश थी जो सिर्फ फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर दिखे। विकास मिश्रा की कार्यशैली को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि:

आम लोगों की सुनवाई बढ़ेगी

सिस्टम में पारदर्शिता आएगी

अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

क्या बदलेगा सीधी का माहौल?

विकास मिश्रा की नियुक्ति को “सख्त प्रशासन + संवेदनशील दृष्टिकोण” के कॉम्बिनेशन के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे अपने पुराने प्रयोगों और सादगी भरे अंदाज को सीधी में कितनी मजबूती से लागू कर पाते हैं।

सीधी को एक ऐसे कलेक्टर मिले हैं जो सिर्फ आदेश देने के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम को अंदर से सुधारने के लिए जाने जाते हैं। अब देखना होगा कि उनकी “लोकसेवक” वाली सोच, जिले की जमीनी हकीकत को कितना बदल पाती है।

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