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पदोन्नति नहीं तो काम नहीं: 6 साल से अटकी फाइलों पर उबाल, 8 अगस्त को सीएम कार्यालय का घेराव

सरकार को दिया था 7 दिन का अल्टीमेटम, नहीं हुई सुनवाई तो आंदोलन हुआ तेज

वेतन विसंगति, कैडर स्ट्रेंथन और पदोन्नति प्रमुख मुद्दे; प्रदेशभर में उग्र आंदोलन की चेतावनी


ब्यावर - ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) संवर्ग की वर्षों से लंबित पदोन्नतियों, वेतन विसंगतियों और 11 सूत्रीय मांगों को लेकर अब प्रदेशभर में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम विकास अधिकारी संघ, जिला ब्यावर के नेतृत्व में चल रहा ‘पदोन्नति नहीं तो काम नहीं’ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों का समाधान नहीं किया, तो 8 अगस्त को जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव किया जाएगा। संघ के जिला अध्यक्ष विजय प्रकाश शर्मा ने बताया कि लंबे समय से संवर्ग की समस्याओं को लेकर सरकार और विभाग को ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। इस बार संगठन ने सात दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है। बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में रोष बढ़ गया है और अब आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन की रणनीति तय करने और ज्ञापन सौंपने के दौरान कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें ब्लॉक अध्यक्ष धर्मा राम, विकास नायक, लाखन सिंह, गुड्डू मीणा, महावीर सेन, केदार मीणा, बृजेश इन्दा, अंजू कालवा, सुनील, मुकेश और रश्मि कुमावत सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।


6 साल से लंबित पदोन्नतियां बनीं असंतोष की जड़
ग्राम विकास अधिकारी संघ का कहना है कि ग्राम विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, अतिरिक्त विकास अधिकारी और विकास अधिकारी जैसे पदों पर पिछले छह वर्षों से पदोन्नतियां लंबित हैं। यह स्थिति तब है जब इस संबंध में 25 अगस्त 2025 को उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जा चुकी है। कर्मचारियों का आरोप है कि बैठक के बाद भी फाइलें आगे नहीं बढ़ीं और मामले को जानबूझकर लंबित रखा गया। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति नहीं होने से कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जिससे उनमें निराशा का माहौल बन गया है।


वेतन विसंगति और आर्थिक नुकसान से बढ़ी नाराजगी
वेतन से जुड़े मुद्दे भी कर्मचारियों के आक्रोश का बड़ा कारण बने हुए हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि पांचवें, छठे और सातवें वेतन आयोग में हुई विसंगतियों के कारण ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघ की प्रमुख मांगों में ग्रेड पे 3600 (लेवल-10) की स्वीकृति, एमएसीपी (MACP) का लाभ 1 जुलाई 2013 से लागू करना, 27 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर तृतीय पदोन्नति का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा विभागीय आदेशों के नाम पर की जा रही वेतन वसूली को भी कर्मचारियों ने अन्यायपूर्ण बताया है। संघ का कहना है कि वर्षों पहले दिए गए वेतन लाभ को वापस लेना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।


कैडर स्ट्रेंथन की मांग: पद बढ़ें, तभी मिलेगा न्याय

संघ ने यह भी मुद्दा उठाया है कि ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग में पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं। इसके लिए कैडर स्ट्रेंथन आवश्यक है। संघ ने मांग की है कि पदोन्नति और सीधी भर्ती का अनुपात वर्तमान व्यवस्था से बदलकर 45:55 किया जाए, जिससे कर्मचारियों को पदोन्नति के अधिक अवसर मिल सकें। इसके साथ ही विकास अधिकारी पद पर पदोन्नति कोटा 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की मांग भी रखी गई है। संघ का कहना है कि यदि पदों की संख्या और पदोन्नति के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो आने वाले समय में असंतोष और बढ़ेगा।

अत्यधिक कार्यभार से जूझ रहे ग्राम विकास अधिकारी
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम विकास अधिकारियों पर अत्यधिक कार्यभार डाल दिया गया है। पंचायतीराज विभाग के अलावा अन्य विभाग भी बिना अनुमति विभिन्न कार्य सौंप देते हैं, जिससे मूल कार्य प्रभावित होता है। संघ ने मांग की है कि अन्य विभागों द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त कार्यों पर रोक लगाई जाए या फिर उसके बदले उचित पारिश्रमिक दिया जाए। इसके साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर सहायक स्टाफ की व्यवस्था, कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति और ई-पंचायत प्रणाली को प्रभावी बनाने की मांग भी की गई है।

प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर
संघ ने पंचायत स्तर पर प्रशासनिक सुधारों की भी मांग उठाई है। इसमें ग्राम पंचायत सचिवालय की स्पष्ट कार्यप्रणाली तय करने, स्थानांतरण नीति में संशोधन करने और कर्मचारियों को गृह जिले में प्राथमिकता देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। संघ का मानना है कि इन सुधारों से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि पंचायतीराज व्यवस्था भी मजबूत होगी।

अब आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी
संघ अध्यक्ष विजय प्रकाश शर्मा ने कहा कि अब संगठन आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि समय रहते मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन प्रदेशभर में उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि 8 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कारण स्थगित किया गया आंदोलन अब फिर शुरू किया गया है, और अब इसे निर्णायक अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।


8 अगस्त को जयपुर कूच, बड़ा प्रदर्शन तय
संघ ने ऐलान किया है कि 8 अगस्त को जयपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से ग्राम विकास अधिकारी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। संघ का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों के हितों का मामला नहीं है, बल्कि पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बनाने का भी मुद्दा है। यदि कर्मचारियों को न्याय नहीं मिला, तो इसका सीधा असर ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ेगा।

सरकार पर बढ़ा दबाव, नजरें 8 अगस्त पर
अब सभी की नजरें 8 अगस्त पर टिकी हैं। यह दिन तय करेगा कि सरकार इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेती है। यदि उससे पहले कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ग्राम विकास अधिकारियों का यह आंदोलन अब केवल मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो 8 अगस्त का घेराव एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

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