असम चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस की पांचवीं सूची जारी, हाफलांग को लेकर अटकलों पर विराम, नामांकन के अंतिम चरण में तेज हुई सियासत
असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पांचवीं सूची जारी कर दी है, जिससे राज्य की चुनावी राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा जारी इस सूची में बिजनी, हाफलांग (एसटी), काटीगोरा, मजबाट, गोसाईगांव, डोटमा और भेरगांव जैसी महत्वपूर्ण सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। इस घोषणा के साथ यह संकेत भी स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कांग्रेस अब अपने उम्मीदवार चयन की अंतिम और निर्णायक प्रक्रिया में पहुंच चुकी है। इस सूची में बिजनी से राजत कांति साहा को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि हाफलांग (एसटी) सीट से निर्मल लांगथासा को टिकट दिया गया है। हाफलांग सीट को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। विशेष रूप से पूर्व भाजपा मंत्री नंदिता गरलोसा के कांग्रेस में संभावित प्रवेश को लेकर लगातार अफवाहें फैल रही थीं। राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा था कि कांग्रेस हाफलांग सीट की घोषणा जानबूझकर रोककर बैठी है और किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की प्रतीक्षा कर रही है। लेकिन पार्टी द्वारा निर्मल लांगथासा के नाम की घोषणा के बाद इन सभी अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व हाफलांग सीट पर अंतिम निर्णय लेने से पहले राजनीतिक परिस्थितियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए था। यह माना जा रहा था कि यदि किसी प्रभावशाली नेता का पाला बदलता है, तो उम्मीदवार चयन की दिशा बदल सकती है। हालांकि अंततः कांग्रेस ने बाहरी संभावनाओं पर भरोसा करने के बजाय संगठनात्मक ढांचे के भीतर से अपने उम्मीदवार को चुनना उचित समझा। इससे यह संदेश गया है कि पार्टी अब चुनाव के अंतिम समय में अनिश्चितताओं को समाप्त कर स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भाजपा से टिकट कटने या असंतोष की खबरों के बावजूद अब तक कोई भी तथाकथित ‘बागी’ भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ है। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा के भीतर टिकट वितरण से नाराज कुछ नेता कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों की ओर रुख कर सकते हैं। लेकिन अब तक ऐसा कोई बड़ा दलबदल सामने नहीं आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि इस बार चुनावी परिदृश्य अपेक्षाकृत अधिक नियंत्रित और अनुशासित नजर आ रहा है, जहां अंतिम समय के राजनीतिक पलटवार सीमित हैं। कांग्रेस की इस पांचवीं सूची को केवल उम्मीदवारों की घोषणा भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे चुनावी रणनीति के एक महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। बिजनी जैसी सीट, जो पहले से विवाद और राजनीतिक हलचल का केंद्र रही है, वहां उम्मीदवार की घोषणा यह दर्शाती है कि पार्टी अब विवादों को पीछे छोड़कर चुनावी मोर्चे पर आगे बढ़ना चाहती है। इसी प्रकार हाफलांग में उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अफवाहों और राजनीतिक कयासों से प्रभावित हुए बिना अपनी संगठनात्मक रेखा पर चल रही है।कल नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि होने के कारण राज्यभर में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नामांकन, शक्ति प्रदर्शन, संगठनात्मक बैठकों और जमीनी प्रचार को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। कांग्रेस भी अब उम्मीदवारों की घोषणा के बाद तेजी से अपने प्रचार अभियान को धार देने की तैयारी में है, ताकि अंतिम समय में कोई राजनीतिक रिक्तता न रह जाए।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों की यह सूची असम में चुनावी लड़ाई को और अधिक तीखा बना सकती है। जिन सीटों पर कांग्रेस ने अब अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं, वहां मुकाबला अब अधिक स्पष्ट और प्रत्यक्ष हो जाएगा। इससे स्थानीय समीकरण, जातीय- सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक शक्ति की वास्तविक परीक्षा भी सामने आएगी। कुल मिलाकर कांग्रेस की पांचवीं सूची ने असम की चुनावी राजनीति में कई संदेश एक साथ दिए हैं हाफलांग को लेकर फैली अफवाहों का अंत, बिजनी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्पष्ट उम्मीदवार चयन, भाजपा के असंतुष्ट नेताओं की ओर से अपेक्षित दलबदल का न होना, और नामांकन की अंतिम तिथि से पहले संगठनात्मक स्पष्टता का प्रदर्शन। अब आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह रणनीतिक स्पष्टता कांग्रेस को राजनीतिक लाभ दिला पाती है या नहीं।