अंतरराष्ट्रीय जल दिवस पर एनएसएस स्वयंसेवियों का सराहनीय प्रयास, मधुगंगा नदी में चलाया स्वच्छता अभियान
द्वारीखाल संबाददाता कमल उनियाल
जयहरीखाल, 22 मार्च 2026।
भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के पंचम दिवस पर अंतरराष्ट्रीय जल दिवस के अवसर पर विविध जागरूकता एवं स्वच्छता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता और जन-जागरूकता को केंद्र में रखते हुए उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में स्वयंसेवियों द्वारा मधुगंगा नदी में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नदी तट पर फैले कांच की बोतलें, प्लास्टिक, पॉलिथीन एवं अन्य ठोस अपशिष्टों को एकत्रित कर सुरक्षित स्थानों पर निस्तारित किया गया। इस पहल का उद्देश्य नदी के जल को प्रदूषण से मुक्त रखना और जल स्रोतों की स्वच्छता को बनाए रखना रहा। स्वयंसेवियों की इस मेहनत से नदी क्षेत्र में स्वच्छता का सकारात्मक संदेश देखने को मिला।
स्वच्छता अभियान के उपरांत स्वयंसेवियों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संतुलन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। ग्रामीणों को बताया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। साथ ही उन्हें भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सक्रिय सहयोग देने के लिए प्रेरित किया गया।
द्वितीय सत्र में "स्वच्छता ही सेवा" विषय पर पोस्टर निर्माण गतिविधि आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में स्वयंसेवियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए "प्लास्टिक मुक्त भारत", "स्वच्छता और स्वास्थ्य" तथा "जल स्रोत जीवन का आधार" जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आकर्षक एवं संदेशपूर्ण पोस्टर तैयार किए। इन पोस्टरों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान शिविर प्रभारी एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने स्वयंसेवियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल समाज में जागरूकता लाते हैं, बल्कि युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय जल दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि युवा वर्ग आगे आए तो पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव संभव है।