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असम में वन्यजीव संरक्षण का नया अध्याय: पहली बार जंगल में छोड़े गए बंदी-प्रजनित 'व्हाइट-रंप्ड' गिद्ध


​विशेष संवाददाता, गुवाहाटी
​गुवाहाटी: असम में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। राज्य के रानी रेंज के अंतर्गत आने वाले नलापारा में पहली बार बंदी-प्रजनित (Captive-bred) 'व्हाइट-रंप्ड' (सफेद पूंछ वाले) गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। इस पहल को लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
​विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ अभियान
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का नेतृत्व असम के वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव एम.के. यादव ने किया। इस अवसर पर देश के जाने-माने संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. विनय गुप्ता, किशोर रिठे, डॉ. सचिन राणदे और डॉ. क्रिस बोडेन भी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में गिद्धों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
​आधुनिक तकनीक का प्रयोग
कुल पांच गिद्धों को एक विशेष रूप से तैयार की गई एवियरी (पक्षीशाला) से छोड़ा गया। पक्षियों को मानवीय हस्तक्षेप से दूर रखने और उन्हें परेशान किए बिना मुक्त करने के लिए एक विशेष 'पुली सिस्टम' (Pulley System) का उपयोग किया गया।
​कड़ी निगरानी जारी
जंगल में छोड़े जाने के बाद इन गिद्धों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। इसके लिए इलाके में अत्याधुनिक कैमरे स्थापित किए गए हैं, ताकि विशेषज्ञ उनकी हर हलचल को मॉनिटर कर सकें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
​गिद्धों की यह प्रजाति पर्यावरण की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इस सफल रिलीज से भविष्य में इनकी संख्या में सुधार की उम्मीद जागी है।

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