हरि राजा के समान कोई नहीं। || ये भूपति, जो नित मिथ्या कर्म करता है, ||1||
यह भगत कबीर जी का शबद है, जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में राग बिलावलु में अंग 856 पर लिखा है। मतलब (आसान भाषा में): हरि (भगवान) के बराबर (दुनिया में) कोई राजा नहीं है। धरती के ये सभी राजा सिर्फ़ चार दिन (थोड़े समय) के हैं, झूठे हैं और सिर्फ़ दिखावे के लिए राज करते हैं। मतलब / व्याख्या (संक्षेप में): भगत कबीर जी इस शबद में साफ़-साफ़ कह रहे हैं कि दुनिया के सभी राजा, बादशाह, अमीर और रईस सभी अस्थिर और झूठे हैं। उनका राज सिर्फ़ कुछ दिनों (चार दिन) का होता है, फिर खत्म हो जाता है। लेकिन भगवान (हरि, अविनाशी भगवान) अविनाशी, सच्चे राजा हैं, उनसे बड़ा कोई नहीं, उनसे ऊँचा कोई नहीं। सच्ची ताकत और सच्चा राज सिर्फ़ भगवान का है। यह शब्द हमें दुनियावी माया, अहंकार और अस्थिर राज से ऊपर उठने और भगवान की सच्ची सर्वोच्चता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है।
वाहेगुरु जी का खालसा || वाहेगुरु जी की फतेह ||
🍳 *दास हरबंस सिंह* 🙏
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