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“एक शिक्षक का प्यार बदल सकता है पूरी ज़िंदगी ❤️”


भारत के एक शहर के पाँचवीं कक्षा के प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका की आदत थी कि वह कक्षा शुरू होने से पहले रोज कहती थीं— “I love you all।” लेकिन वह जानती थीं कि वह सच नहीं कह रही हैं, क्योंकि वह कक्षा के सभी बच्चों को समान रूप से प्यार नहीं करती थीं।

राजू नाम का एक लड़का था, जिसे वह बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। राजू गंदे कपड़े पहनकर स्कूल आता था। उसके बाल बिखरे रहते, जूतों के फीते खुले होते, शर्ट के कॉलर पर मैल लगा होता। पढ़ाते समय भी वह अनमना रहता। मैडम की डाँट सुनकर वह चौंककर उनकी ओर देखता, लेकिन उसकी खाली नज़रें बता देतीं कि उसका मन कहीं और भटक रहा है। धीरे-धीरे शिक्षिका के मन में राजू के प्रति चिढ़ पैदा हो गई।

राजू जैसे ही कक्षा में आता, वह उनकी आलोचना का शिकार बन जाता। हर गलत काम का उदाहरण उसी के नाम से दिया जाता। बच्चे उस पर हँसते और मैडम भी उसे अपमानित करके मानो संतोष पातीं। राजू कभी विरोध नहीं करता। हर डाँट, ताना और सज़ा के जवाब में वह बस शून्य नज़रों से देखता और सिर झुका लेता। इस तरह वह शिक्षिका का सबसे नापसंद छात्र बन गया।

पहले सत्र के अंत में रिपोर्ट कार्ड तैयार हुआ। मैडम ने राजू के बारे में कई नकारात्मक टिप्पणियाँ लिख दीं। नियम के अनुसार रिपोर्ट कार्ड पहले प्रधानाध्यापिका के पास भेजा गया। उन्होंने राजू की रिपोर्ट देखकर मैडम को बुलाया और कहा,

“मैडम, कुछ प्रेरणादायक बातें भी लिखनी चाहिए। आपने जो लिखा है, उससे उसके माता-पिता निराश हो जाएंगे।”

मैडम ने उत्तर दिया,

“माफ़ कीजिए, लेकिन राजू बहुत खराब और आलसी छात्र है। मैं उसके बारे में अच्छा कुछ नहीं लिख सकती।”

प्रधानाध्यापिका चुपचाप राजू के पिछले वर्षों के रिपोर्ट कार्ड मैडम की मेज़ पर रख गईं।

अगले दिन मैडम ने रिपोर्ट खोली। तीसरी कक्षा की टिप्पणी में लिखा था—

“राजू जैसा मेधावी छात्र मैंने नहीं देखा। अत्यंत संवेदनशील है और सहपाठियों व शिक्षकों का सम्मान करता है। अंतिम सत्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया।”

चौथी कक्षा की रिपोर्ट में लिखा था—

“राजू की पढ़ाई पर उसकी माँ की बीमारी का गहरा असर पड़ा है। वह अनमना हो गया है। उसकी माँ का देहांत हो गया है। राजू को संभालना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”

यह पढ़कर मैडम की आँखों में आँसू आ गए। उन्हें समझ में आ गया कि राजू के जीवन की रोशनी बुझ गई थी।

अगले दिन कक्षा में आकर उन्होंने फिर कहा, “I love you all।” लेकिन आज वह सचमुच महसूस कर रही थीं कि बिखरे बालों वाला वह बच्चा उनके हृदय में विशेष स्थान रखता है।

उन्होंने राजू से प्रश्न पूछा और इस बार उत्तर भी बता दिया, उसे केवल दोहराने को कहा। कई प्रयासों के बाद राजू उत्तर दे सका। मैडम ने न केवल स्वयं ताली बजाई, बल्कि पूरी कक्षा से भी ताली बजवाई। इसके बाद वह प्रतिदिन उसे प्रोत्साहित करने लगीं।

धीरे-धीरे राजू बदल गया। अब वह स्वयं उत्तर देने लगा, प्रश्न पूछने लगा, साफ कपड़े पहनकर आने लगा। वर्ष के अंत में उसने द्वितीय स्थान प्राप्त किया और अगली कक्षा में पहुँच गया।

विदाई समारोह में सभी बच्चों ने सुंदर पैक किए हुए उपहार दिए। राजू का उपहार पुराने कागज़ में लिपटा था। खोलने पर उसमें आधी इस्तेमाल की हुई इत्र की शीशी और एक कंगन था, जिसके अधिकांश मोती टूट चुके थे।

मैडम ने चुपचाप इत्र अपने ऊपर लगा लिया और कंगन पहन लिया। राजू पास आकर बोला,

“आज आपसे मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।”

समय बीतता गया। हर वर्ष राजू की ओर से एक पत्र आता—

“मुझे कई शिक्षक मिले, लेकिन आपके जैसा कोई नहीं।”

कुछ वर्षों बाद एक पत्र आया—

“इस महीने के अंत में मेरी शादी है। आपके बिना शादी की कल्पना नहीं कर सकता।

डॉ. राजू।”

शादी के दिन जब मैडम पहुँचीं, तो राजू ने सबके सामने कहा—

“दोस्तों, आप सब मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे। आज मैं आपको उनसे मिलवा रहा हूँ— ये हैं मेरी माँ।”

यह कहानी हमें सिखाती है कि एक शिक्षक का स्नेह और विश्वास किसी बच्चे का जीवन बदल सकता है।

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