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बिहार दिवस 2026: गौरवशाली अतीत से स्वर्णिम भविष्य की ओर एक अटूट यात्रा ।

"जिस मिट्टी ने दुनिया को लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाया, और बुद्ध-महावीर की करुणा से जग को महकाया;
उस गौरवशाली विरासत का मैं एक अंश हूँ, गर्व है मुझे कि मैं बिहार का वंश हूँ।"

22 मार्च 2026 को बिहार अपनी स्थापना का "114वाँ वर्ष" मना रहा है। यह केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि उन करोड़ों बिहारियों के स्वाभिमान, संघर्ष और संकल्प का उत्सव है, जिन्होंने अपनी पहचान के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। आज जब पूरा राज्य "उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार" की थीम के साथ अपनी खुशहाली का जश्न मना रहा है, तो यह समय पीछे मुड़कर उन पन्नों को पलटने का है जिन्होंने आधुनिक बिहार की नींव रखी।

20वीं सदी की शुरुआत में बिहार, बंगाल प्रेसीडेंसी का एक हिस्सा मात्र था। सत्ता का केंद्र कलकत्ता था और बिहार के हितों की अनदेखी आम बात थी। सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व की कमी और विकास कार्यों में भेदभाव ने बिहार के युवाओं और बुद्धिजीवियों को झकझोर दिया।

इस आंदोलन के 'भीष्म पितामह' "डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा" ने अपनी कलम और दूरदर्शिता से इस मांग को धार दी। 1894 में 'बिहार टाइम्स' के माध्यम से उन्होंने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि एक पृथक राज्य केवल मांग नहीं, बल्कि बिहारियों की उत्तरजीविता की जरूरत है।

दिल्ली दरबार का वो ऐतिहासिक घोषणा जो एक इतिहास बना गया ।

दिसंबर 1911 की वह कड़कड़ाती ठंड बिहार के इतिहास में नई गर्माहट लेकर आई। दिल्ली के शाही दरबार में इंग्लैंड के राजा "जॉर्ज पंचम" ने जब बंगाल से अलग कर बिहार और ओडिशा को एक नए प्रांत के रूप में गठित करने का ऐलान किया, तो मानो करोड़ों चेहरों पर एक साथ मुस्कान तैर गई। इसके ठीक 102 दिन बाद, 22 मार्च 1912 को आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई और आधुनिक बिहार का उदय हुआ।

बिहार की मिट्टी साधारण नहीं है; यह वह भूमि है जिसने दुनिया को लोकतंत्र का पहला पाठ (वैशाली) पढ़ाया।

बिहार का नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालय यहाँ की विद्वता के प्रमाण हैं।

बिहार अहिंसा का उद्गम स्थल है भगवान बुद्ध और महावीर की यह कर्मभूमि आज भी शांति और करुणा का संदेश देती है।

बिहार की सांस्कृतिक वैभव मधुबनी पेंटिंग की सूक्ष्मता, लोक गीतों की मिठास और मुंडेश्वरी मंदिर जैसी प्राचीन धरोहरें हमारी विशिष्ट पहचान हैं।

आज का बिहार अपनी प्राचीन 'ज्ञान परंपरा' को पुनर्जीवित कर रहा है। देश की प्रशासनिक सेवा (IAS/IPS) हो या विज्ञान और तकनीक का क्षेत्र, बिहार के युवाओं का दबदबा आज भी कायम है। बिहार दिवस का यह अवसर राज्य के नागरिकों और दुनिया भर में फैले प्रवासी बिहारियों में गर्व की भावना जगाता है कि हम उस मिट्टी से हैं जिसने शून्य (0) का आविष्कार करने वाले आर्यभट्ट को जन्म दिया।

वर्ष 2026 की थीम हमें याद दिलाती है कि हमारी विरासत जितनी समृद्ध है, हमारा भविष्य उतना ही उज्ज्वल होना चाहिए। सतत विकास, शिक्षा के आधुनिकीकरण और औद्योगिक उन्नति के साथ बिहार अब एक नई करवट ले रहा है।

बिहार दिवस 2026 महज़ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा है—अपने गौरवशाली अतीत को सहेजने की और एक सशक्त, शिक्षित और विकसित बिहार के निर्माण की। यह संगम है उस स्वाभिमान का जो 1912 में जागा था और उस महत्वाकांक्षा का जो 2026 के बिहार की आँखों में चमक रही है।

"सभी बिहारवासियों को बिहार दिवस की अनंत शुभकामनाएँ!"

मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT

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Comment
  • Purushottam Jha

    बिहार का गौरवशाली इतिहास तो रहा पर मध्य काल मे दोहन भी ख़ूब हुआ ।वर्तमान पुनर्व्यवस्थित होने के प्रयास में है