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विश्व स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सृजन कृषि एवं प्रौद्योगिकी विकास में मानवीय संवेदनाओं और अस्तित्व पर चिंतन कृष्ण कुमार पाठक लेखक/पत्रकार

मानव जीवन में प्राकृतिक एवं मानव जीवन का अद्भुत संयोग ईश्वरी सत्ता का वरदान कहना अन्यथा ना होगा।
वर्तमान समय में वैश्विक पटल पर जो प्रकृति के दोहन की चिंगारी भड़क रही है निश्चित तौर पर यह विनाशक एवं भविष्य के लिए चिंताजनक का संदेश देता दिखाई दे रहा है ।
आज विश्व पटल पर कहीं ना कहीं हम एक दूसरे के जीवन को जीवंत बनाए रखने में आपसी प्रेम सौहार्द के बिना संभव है।
प्राकृतिक ने हमें जीवन को जीवंत बनाए रखने में कहीं ईंधन है तो कहीं जल है तो कहीं प्राकृतिक है तो कहीं औषधीय हैं तो कहीं सौरमंडल द्वारा ऊर्जा शक्ति और जीवन को जीवंत बनाए रखने के लिए प्राकृतिक स्रोतों को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए सक्षम है जहां हमारी प्रतिभा भी उत्पत्ति और अभ्यास के द्वारा हम एक विकसित राष्ट्र को मस्तिष्क चेतन द्वारा ज्ञान, विज्ञान ,अनुसंधान आध्यात्मिक चेतना द्वारा सार्वभौमिक रूप से ज्ञान के दीप द्वारा विश्व को एक नवीन दिशा की ओर ले जाना ही वास्तविक वैश्विक संबंधों का आधार है।
उपरोक्त भाव का मूल सार है कि विनाश के मोड़ पर विश्व के सभी सदस्य देशों में महत्वपूर्ण भूमिका प्राकृतिक संसाधनों पर सुरक्षा संरक्षण संवर्धन विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने का पहल होना चाहिए।
कृष्ण कुमार पाठक

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