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शिक्षक तबादला घोटाला: 268 शिक्षक और अधिकारी जांच के घेरे में; 300 पर गिरी गाज!

महाराष्ट्र के अकोला जिला परिषद में अंतर-जिला शिक्षक तबादला प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर तबादले का लाभ लेने वाले शिक्षकों और इसमें शामिल अधिकारियों पर अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
​प्रमुख बिंदु:
​फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल: लगभग 268 शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने तबादला पाने के लिए दिव्यांग होने के फर्जी सर्टिफिकेट, गंभीर बीमारियों के झूठे कागजात और परित्यक्ता (छोड़ी हुई महिला) होने के फर्जी प्रमाण पत्र पेश किए।
​दूरी का गलत विवरण:
कुछ शिक्षकों ने अपने निवास स्थान की दूरी के बारे में भी गलत जानकारी देकर नियमों का उल्लंघन किया।
​अधिकारियों की मिलीभगत: इस घोटाले में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। फिलहाल एक प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) सहित 5 लोगों को निलंबित कर दिया गया है।
​खुलासा और धमकियां:
आरटीआई कार्यकर्ता गणेश कुरई ने इस पूरे मामले का भंडाफोड़ किया। शुरुआत में उन्हें डराया-धमकाया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन विधायक हरीश पिंपले के हस्तक्षेप के बाद जांच में तेजी आई।
​सख्त कार्रवाई की मांग:
वास्तविक दिव्यांगों और हकदार शिक्षकों का अधिकार छीनने वाले इन 300 लोगों पर अब कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। पूरा शिक्षा जगत इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि दोषियों को क्या सजा मिलती है।

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