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♦️♦️औरतों के पास बातें बड़ी हैं, इन छोटे शहर की औरतों के पास बातें बड़ी हैं।♦️♦️

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इन छोटे शहर की औरतों के पास बातें बड़ी हैं

कभी गली के बीचों-बीच तो कभी देहरी पर बेपरवाह-सी खड़ी हैं

सुबह सब्ज़ी के ठेले पर सब इकट्ठा हो सब्ज़ी वाले को असली भाव बताती हैं

काम वाली बाई से बातों-बातों में

दूसरों के राज पूछती और अपने छिपाती हैं

"हालचाल पूछ लूं जरा" ये कहकर फोन पर घंटों बतियाती हैं

निकलें कभी जो जरूरी काम से बाहर, पड़ोसन की एक आवाज़ पर वो काम भूल जाती हैं

शाम को चौपाल पर दिनभर की चर्चा करके अपनी थकान मिटाती हैं

बातों-बातों में किसी बाबा का ज्ञान, कहाँ है सस्ते राशन की दुकान,

स्वेटर का नया नमूना, कैसे बनता है मिक्स अचार,

छोटी-मोटी बीमारियों का घरेलू उपचार, कैसे बढ़ायें दाल-सब्ज़ी का स्वाद

पता ही नहीं चलता बैठे-बैठे कब इतना आदान-प्रदान कर देती हैं

निर्थकता को सार्थकता में कैसे बदलें? छोटे शहर की औरतें हमें यह बड़ी बात सिखाती हैं।

- गुरदीप कौर

मुरादाबाद (उ.प्र.)

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