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विधायक की मानवीय पहल: कैंसर पीड़ित मोनू के लिए 'मसीहा' बने सहदेव सिंह पुंडीर, गले लगाकर कहा- "चिंता मत करो, हम साथ हैं"

​देहरादून (पछवादून): राजनीति जब सेवा का माध्यम बनती है, तो वह किसी टूटते हुए परिवार के लिए संजीवनी साबित होती है। सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासी मोनू कुमार, जो इन दिनों कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहे हैं, उनके लिए स्थानीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आए हैं। जब परिवार हर तरफ से निराश होकर हार मान चुका था, तब विधायक की संवेदनशीलता ने उन्हें न केवल आर्थिक सहारा दिया, बल्कि जीवन जीने की नई राह भी दिखाई।

कैंसर की पुष्टि होने के बाद मोनू के परिवार ने स्थानीय अस्पतालों से लेकर सरकारी सुविधाओं तक हर दरवाजा खटखटाया। इलाज की जटिलता और दवाओं के भारी खर्च के कारण स्थिति हाथ से निकलती जा रही थी। आयुष्मान योजना के बावजूद कई विशेष जांचों और उन्नत उपचार के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता थी, जो इस साधारण परिवार की पहुंच से बाहर था। दर-दर भटकने के बाद, हताश परिवार ने अंतिम उम्मीद के साथ विधायक सहदेव सिंह पुंडीर से संपर्क किया।

इस पूरी घटना का सबसे मार्मिक पहलू वह था, जिसका जिक्र खुद मोनू ने हमसे बातचीत के दौरान किया। मोनू बताते हैं कि जब वे अपनी गुहार लेकर विधायक कार्यालय पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई, तो विधायक सहदेव सिंह पुंडीर ने भरे दरबार में उन्हें अपने पास बुलाया, गले से लगाया और बड़े भाई की तरह ढांढस बंधाते हुए कहा— "खड़े हो जाओ मोनू, बिल्कुल चिंता मत करो। चाहे कितना ही महंगा अस्पताल हो, हम तुम्हारा अच्छे से अच्छा इलाज कराएंगे। हम तुम्हारे साथ हैं।"

विधायक के इन शब्दों ने मोनू को वह मानसिक बल दिया, जो किसी भी दवा से ज्यादा असरदार साबित हो रहा है।

विधायक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए मोनू को चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित अस्पताल में भर्ती कराने की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की, जहाँ वर्तमान में उनका इलाज चल रहा है। इतना ही नहीं, महंगे टेस्ट और दवाइयों के लिए विधायक ने निजी तौर पर भी मदद मुहैया कराई है, ताकि धन के अभाव में उपचार बाधित न हो।

अक्सर सवाल उठता है कि मदद को सार्वजनिक क्यों किया जाता है? लेकिन यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि यह जानकारी विधायक कार्यालय से नहीं, बल्कि स्वयं पीड़ित मोनू ने "कलम की बातें" के माध्यम से साझा की है। मोनू का कहना है कि जब दुनिया ने साथ छोड़ दिया था, तब विधायक जी ने उनका हाथ थामा। वे चाहते हैं कि यह सच्चाई समाज के सामने आए ताकि लोगों को पता चले कि मानवता अभी जिंदा है। उनका मानना है कि अगर समाज में बुराई की चर्चा होती है, तो ऐसी 'मानवीय मिसालों' का जिक्र भी जरूरी है ताकि दूसरों को भी सेवा की प्रेरणा मिल सके।

विधायक की इस पहल पर मोनू के परिजनों ने भावुक होते हुए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आज मोनू का इलाज सही दिशा में चल रहा है और उन्हें एक नई उम्मीद मिली है। क्षेत्र में विधायक के इस निस्वार्थ सेवा भाव की हर ओर सराहना हो रही है।

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