Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, क्या हिमाचल बनेगा 'आत्मनिर्भर'? जानें बड़ी घोषणाएं
Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, क्या हिमाचल बनेगा 'आत्मनिर्भर'? जानें बड़ी घोषणाएं
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी सरकार का चौथा बजट पेश कर रहे हैं। सुबह 11:00 बजे बजट भाषण शुरू हो चुका है और प्रदेश के हर वर्ग की नजरें इस पर टिकी हैं।
इस बार के बजट पर प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों और केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने का साफ़ असर देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहले ही संकेत दिए थे कि बजट के आंकड़ों में पिछले साल के मुकाबले कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी।
एक नज़र अहम घोषणाओं पर:
किसानों और पशुपालकों को बड़ी राहत:
* दूध खरीद मूल्य में भारी वृद्धि: मुख्यमंत्री सुक्खू ने पशुपालकों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए गाय के दूध की खरीद कीमत को ₹51 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध के दाम ₹61 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर कर दिए हैं। इस कदम का सीधा लाभ ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी।
* भेड़पालन और ऊन उत्पादन को बढ़ावा: राज्य में भेड़पालन को बढ़ावा देने के लिए ₹300 करोड़ की योजना शुरू की जा रही है। ऊन की खरीद पर किसानों को ₹100 प्रति किलोग्राम का 'प्राइस सपोर्ट' दिया जाएगा। आधुनिक तकनीक और लैब विश्लेषण के लिए ₹2 करोड़ का अलग बजट रखा गया है।
* फसलों के MSP में बढ़ोतरी: गेहूं, मक्की, पांगी का जौ और हल्दी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की गई है। हिमाचल में पहली बार अदरक के लिए ₹30 का MSP तय किया गया है।
* अन्य पहल: 'राज्य किसान आयोग' बनाने और पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए विशेष 'बीज गांव' स्थापित करने की घोषणा की गई है।
मछुआरों को समर्थन:
* मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना: जलाशय से पकड़ी गई मछली के लिए कम से कम ₹100 का MSP दिया जाएगा।
* नई नाव के लिए अनुदान: मछुआरों को नई नाव खरीदने के लिए 70% सरकारी मदद मिलेगी।
पलायन रोकने और रोजगार के प्रयास:
* गरीब परिवारों को संबल: 'मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना' के तहत पहचाने गए करीब एक लाख गरीब परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और पात्र महिलाओं को ₹1500 की मासिक सहायता मिलेगी। बिना पक्के मकान वाले परिवारों को चरणबद्ध तरीके से घर दिए जाएंगे।
* भर्ती: पंचायत सचिवों के 150 पदों पर और पंचायत चौकीदारों के पद भी चरणबद्ध तरीके से भरे जाएंगे।
* स्वरोजगार: युवाओं के लिए 500 ई-टैक्सी की खरीद पर 50% छूट देने का ऐलान किया गया है, जिसके लिए ₹50 करोड़ का बजट रखा गया है। ई-टैक्सी के मासिक किराए में ₹5,000 की बढ़ोतरी की गई है।
* महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों को ₹150 करोड़ का कर्ज देने का लक्ष्य रखा गया है।
पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास:
* पर्यटन स्थल विकास: धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाने के लिए श्री ज्वालाजी और श्री नैना देवी जी जैसे पवित्र स्थलों का विकास होगा। होटल पीटरहॉफ और होटल हमीर का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा।
* नई पहल: पर्यटन पंजीकरण के लिए PPP मॉडल आधारित सिस्टम, माउंटेन बाइकिंग रूट, पर्यटन स्थलों पर रात में पिकनिक और दुकानों को 24 घंटे खुला रखने की अनुमति जैसी पहल की जा रही है।
* कनेक्टिविटी: कांगड़ा एयरपोर्ट के पास आधुनिक एरोसिटी, अगले महीने से दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला के बीच नियमित उड़ानें और सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट से जोड़ने की योजना है।
* होटल उद्योग को सहायता: 20 से 30 कमरों वाले नए होटलों के लोन पर 4 से 5 प्रतिशत सब्सिडी और महिला यात्रियों के लिए 'सोलो शी ट्रैवलर' पॉलिसी शुरू की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण:
* वन क्षेत्र बढ़ाना: साल 2030 तक राज्य के वन क्षेत्र को 32% करने का लक्ष्य। 2026-27 के दौरान 4,000 हेक्टेयर भूमि पर नए पौधे लगाए जाएंगे।
* ईकोटूरिज्म: 50 नई ईकोटूरिज्म साइट्स विकसित और 50 विश्राम गृहों की बुकिंग ऑनलाइन की जा सकेगी।
आर्थिक चुनौतियां और सरकार का रुख:
मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य की चुनौतीपूर्ण वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज के दबाव का ज़िक्र किया। प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है और हर महीने वेतन-पेंशन के लिए ₹2800 करोड़ चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा RDG और GST मुआवजे में कमी पर चिंता जताई, लेकिन भरोसा दिलाया कि जनता से किए गए सभी वादे और गारंटियां हर हाल में पूरी की जाएंगी।
बजट का कुल हिस्सा ₹54,928 करोड़ तय किया गया है, जो पिछले साल के ₹58,514 करोड़ के मुकाबले करीब ₹3,586 करोड़ कम है। बजट पर सामान्य चर्चा सोमवार से शुरू होकर 25 मार्च तक चलेगी, जिसके बाद विस्तृत चर्चा और 30 मार्च को आधिकारिक तौर पर इसे पास किया जाएगा।
निष्कर्ष:
हिमाचल प्रदेश का यह बजट आर्थिक चुनौतियों के बीच विकास और जनकल्याण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और गरीब परिवारों के लिए की गई घोषणाएं राहत प्रदान करेंगी, जबकि पर्यटन और स्वरोजगार पर ध्यान राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक कदम हो सकता है। अब देखना यह है कि क्या यह बजट हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कितनी तेज़ी से आगे ले जाता है।