शाहपुर पटोरी: विकास के दावों की खुली पोल, बेमौसम बारिश ने छीनी किसानों की मुस्कान ।
“बस्तियाँ चाँद पर बसाने की हसरत है मगर,
हाल यह है कि जमीं पर जल-निकासी भी नहीं।”
कल शाम से लेकर रात तक (समाचार लिखे जाने तक) शाहपुर पटोरी नगर परिषद क्षेत्र में हुई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने न केवल आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, बल्कि प्रशासन के विकास कार्यों की कलई भी खोल कर रख दी है। पूरी रात अंधेरे में डूबा नगर परिषद क्षेत्र अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा था।
पटोरी के किसानों पर कुदरत की मार असहनीय है इस बेमौसम बारिश और आंधी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी "गेहूं और सरसों" की फसल को भारी नुकसान की आशंका है।
गेहूं की स्थिति ये है कि बालियां आने के कारण पौधे भारी हो चुके हैं। तेज हवा और पानी से फसल गिर गई है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।
दूसरी ओर आम की फसल इस बार पहले ही पिछले साल के मुकाबले कम है, ऊपर से इस असामयिक बारिश ने बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।
नगर परिषद की 'जलमग्न' हकीकत ये है कि अभी तो मानूसन की शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन कल की बारिश ने स्थानीय "चंदन चौक" और "अनुमंडलीय अस्पताल" के सामने जल-जमाव का जो नजारा दिखाया, वह डराने वाला है। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह के सामने पानी का जमाव नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
हर साल की तरह इस साल भी जल-जमाव के कारण गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ना तय है, जिससे क्षेत्र में बीमारियां पनपने का खतरा बढ़ गया है।
पटोरी में सत्ता की मलाई और जनता की विवशता दुखद है ।
शाहपुर पटोरी का दुर्भाग्य देखिए कि यह क्षेत्र दो विधानसभाओं (मोहिउद्दीननगर और मोरवा) का मुख्यालय है और यहाँ के सांसद वर्तमान में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री (नित्यानंद राय) जैसे कद्दावर नेता हैं। एक तरफ नगर परिषद का भारी-भरकम बजट है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर लगा गंदगी का अंबार।
शाहपुर पटोरी का कड़वा सच ये है कि चुनावी समय में बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि—चाहे वो वार्ड पार्षद हों, मुख्य पार्षद (मेयर), उप-मुख्य पार्षद हों या बड़े राजनेता—आज केवल योजना मद में मिलने वाले 'कमीशन' के खेल में उलझे हुए हैं।
नैतिक पतन की स्थिति यह है कि जनता की मूलभूत समस्याओं से ऊपर सबका अपना-अपना निजी स्वार्थ और डिमांड है।
पटोरी की जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। जिस क्षेत्र से सत्ता के ऊंचे गलियारों तक पहुंच हो, वहां की बुनियादी स्थिति इतनी शर्मनाक होना विकास के दावों पर तमाचा है। अगर समय रहते जल-निकासी और सफाई की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आने वाला मानसून पटोरी वासियों के लिए किसी नरक से कम नहीं होगा।
मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT