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उत्तर प्रदेश को 4 साल बाद स्थायी DGP मिलेगा। योगी सरकार ने कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण को यूपी पुलिस का स्थायी डीजीपी बनाने का निर्णय लिया है। राजीव कृष

उत्तर प्रदेश को 4 साल बाद स्थायी DGP मिलेगा। योगी सरकार ने कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण को यूपी पुलिस का स्थायी डीजीपी बनाने का निर्णय लिया है। राजीव कृष्ण 31 मई, 2025 से लगातार कार्यवाहक DGP के पद पर हैं। उन्हें 11 अफसरों को पीछे छोड़ते हुए यह पद दिया जाएगा। इस नियुक्ति से सीनियर आईपीएस अफसर रेणुका मिश्रा को बाहर कर दिया गया है, जिन्हें पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में जिम्मेदार माना गया।

राजीव कृष्ण ने प्रशांत कुमार की जगह कार्यवाहक DGP के रूप में संभाली थी। यह यूपी के लगातार पांचवें कार्यवाहक डीजीपी हैं। यूपीएससी के नियमों के अनुसार, स्थायी DGP पद के लिए बेदाग, योग्य और वरिष्ठतम अधिकारियों में से चयन होता है। उनके चयन से 1989 और 1990 बैच के कई वरिष्ठ अफसर पीछे रह गए। इनमें सफी अहसन रिजवी, अशीष गुप्ता, आदित्य मिश्रा, संदीप साळुंके, दलजीत चौधरी, बिजय कुमार मौर्य, एमके बशाल, तिलोत्मा वर्मा, 1991 बैच के आलोक शर्मा और पीयूष आनंद शामिल थे।

राजीव कृष्ण का UPSC पैनल में 12वां नंबर था, लेकिन योगी सरकार ने उन्हें स्थायी DGP बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस निर्णय से राज्य पुलिस प्रशासन में स्थिरता आएगी और प्रमुख सुधारों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। स्थायी डीजीपी बनने के साथ ही राजीव कृष्ण पुलिस प्रशासनिक मामलों, सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के सुधारों पर फोकस करेंगे।

राजीव कृष्ण का कार्यकाल आगामी चार साल तक रहेगा, जबकि पुलिस भर्ती, प्रशिक्षण और अपराध नियंत्रण में उनकी भूमिका और बढ़ जाएगी। यह निर्णय यूपी पुलिस में नेतृत्व और करियर पथ को लेकर अहम माना जा रहा है।

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