चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं, दिव्यांगों, सेवा मतदाताओं और चुनाव ड्यूटी कर्मियों को डाक मतपत्र से मतदान की सुविधा :-
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक समावेशी, सुलभ और मतदाता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग मतदाताओं, सेवा मतदाताओं तथा चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मियों के लिए डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले को चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने और ऐसे मतदाताओं के लिए राहतकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो शारीरिक, आयुजनित या सेवागत कारणों से मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई महसूस करते हैं।निर्वाचन आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60(सी) के प्रावधानों का उपयोग करते हुए 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और चिन्हित दिव्यांग व्यक्तियों को डाक मतपत्र से मतदान करने की अनुमति दी है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाना तो चाहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य, गतिशीलता या अन्य व्यावहारिक कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते। आयोग का यह कदम इस बात का संकेत है कि चुनावी व्यवस्था अब केवल मतदान कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रत्येक पात्र मतदाता सम्मानपूर्वक और सुविधाजनक ढंग से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। इस सुविधा का दायरा केवल वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों तक सीमित नहीं है। आयोग ने सेवा मतदाताओं जैसे सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और अन्य संबंधित सेवाओं में कार्यरत कर्मियों के साथ-साथ चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी डाक मतपत्र से मतदान की सुविधा देने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रसेवा या चुनावी जिम्मेदारी निभाने वाले लोग अपने कर्तव्य के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाएं। इस प्रकार, आयोग ने चुनावी व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और व्यावहारिक बनाने की कोशिश की है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, इस सुविधा का लाभ उठाने के इच्छुक पात्र मतदाताओं को फॉर्म 12D भरना होगा। यह फॉर्म संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के माध्यम से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) को जमा करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आवेदन चुनाव अधिसूचना जारी होने के पांच दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। समयसीमा का पालन न करने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया सख्त निगरानी और निर्धारित नियमों के तहत संपन्न कराई जाएगी, ताकि मतदान की गोपनीयता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। पात्र मतदाताओं के निवास स्थान से मतपत्र संग्रहित करने की व्यवस्था भी अधिकारियों द्वारा की जाएगी। इससे ऐसे मतदाताओं को मतदान केंद्र तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे अपने घर से ही सुरक्षित व वैधानिक तरीके से मतदान कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से बुजुर्गों और गंभीर रूप से दिव्यांग मतदाताओं के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनावी भागीदारी केवल संख्या का विषय नहीं, बल्कि पहुंच और अवसर की समानता का भी प्रश्न है। महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और सेवागत कारणों से दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात मतदाताओं को बराबरी का अवसर देना लोकतंत्र की गुणवत्ता को मजबूत करता है। निर्वाचन आयोग का यह कदम उसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डाक मतपत्र की सुविधा के विस्तार से मतदान प्रतिशत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जिन मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में है लेकिन शारीरिक या प्रशासनिक कारणों से मतदान केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं होता, वे अब इस वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रह सकेंगे। इससे न केवल उनकी भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता भी मजबूत होगी। कुल मिलाकर, निर्वाचन आयोग का यह फैसला भारतीय लोकतंत्र को अधिक सहभागी, अधिक मानवीय और अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। इससे यह संदेश भी जाता है कि लोकतंत्र की असली मजबूती तभी संभव है, जब हर वर्ग, हर आयु और हर परिस्थिति के मतदाता को अपने मताधिकार के प्रयोग का व्यावहारिक अवसर मिले। आगामी विधानसभा चुनावों में यह नई व्यवस्था कितनी प्रभावी सिद्ध होती है, इस पर भी देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।