*संकट की घड़ी में देश के प्रति हमारा कर्तव्य देश को पता है मोदी जी के नेतृत्व में देश सुरक्षित हाथों में है
,संकट के समय में जहां आम जनता को सरकार से उम्मीद है, तो सरकार को भी जनता से धैर्य,सयम, सहयोग की उम्मीदें रहती हैं,क्योंकि भारत भावनाओं में बहने वाला, संकट के समय भी आवश्यक सेवाओं पर मुनाफा कमाने वाला और जल्द घबराने वाली भीड़ का देश बनता जा रहा है।
कभी-कभी लगता है कि हम स्वार्थ और जल्द घबराने की मानसिकता से घिरे हुए लोग हैं।
दूसरे देशों में युद्ध छिड़ा हुआ है, लेकिन भारत में कुछ लोगों का गैस के नाम पर रो-रोकर बुरा हाल है।
जरा सोचिए — अगर हमारा अपना देश एक महीने के लिए युद्ध जैसी स्थिति में चला जाए, तो ये लोग क्या करेंगे?
अमेरिका, इजरायल या ईरान में युद्ध हो रहा है तो सरकार क्या करे?
क्या सेना लेकर वहां कूद जाए कि पहले हमारे लिए तेल भेजो, बाद में फिर लड़ लेना?
क्योंकि हमारे यहां लोगों को सिलेंडर जलाकर उस पर रोटियां सेंकनी हैं?
जब भारत अपनी LPG की लगभग 60% जरूरत आयात से पूरी करता है और खाड़ी देशों में तनाव या युद्ध की स्थिति बनती है, तो स्वाभाविक है कि थोड़ा बहुत संकट पैदा होगा,
विडंबना यह भी है कि उन लोगों में बड़ा वर्ग ऐसा है, जिनके पास 5-7 साल पहले तक गैस सिलेंडर भी नहीं था।सरकारी योजनाओं से उन्हें सिलेंडर मिला आज वही सिलेंडर सरकार के खिलाफ गुस्से का कारण बन रहा है, *हमसे लाख अच्छे तो ईरान के निवासी हैं, वहां की महिलाएं हथियार खरीदने के लिए अपने सोने के गहने बेचने पर उतारू है, पर शत्रुदेश के आगे झुकना उन्हें मजूर नहीं*
दूसरे देशों के युद्ध के कारण आप इतनी जल्दी टूट जाते हो, और फिर कहते हो कि पाकिस्तान से युद्ध करके कश्मीर, बलूचिस्तान, सिंध और गिलगित-बाल्टिस्तान आजाद करवा देंगे।
सच तो यह है कि अगर ऐसा युद्ध शुरू हुआ, तो यही लोग नमक, गैस, तेल और आटे के नाम पर संसद और प्रधानमंत्री आवास घेरने पहुंच जाएंगे
अगर कुछ दिन देर हो जाए तो इंडक्शन इस्तेमाल कर लो,
इंडक्शन न मिले तो चूल्हे पर खाना पका लो।देश के प्रति कुछ तो दायित्व निभाओ।
यह देश सिर्फ उनका नहीं है जो सीमा पर शहीद हो जाते हैं —
यह देश आपका भी है,और सिर्फ वोट देकर नागरिक कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता।
जब संकट की घड़ी आती है, तो हर नागरिक को भी एक सैनिक की तरह धैर्य और जिम्मेदारी के साथ खड़ा होना पड़ता है, ताकि आपको खुद अपने ऊपर गर्व हो आपकी सरकारों को आपके ऊपर गर्व हो,
*अवतोष शर्मा स्वतंत्र पत्रकार*