यूपी पंचायत चुनाव पर उच्च न्यायालय सख्त, सरकार से हुए तीखे प्रश्न
लखनऊ/इलाहाबाद -पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल किया कि चुनाव के अंतिम समय में मतदाता क्यों नहीं जा रहे हैं और क्या आयोग संवैधानिक समय सीमा के अंदर पूरी तरह से प्रक्रिया में है।उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव की तारीखों का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. चुनाव में देरी के संकेतों को लेकर एक याचिका दायर की गई थी, जिसपर हाईकोर्ट ने योगी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल किया है. बता दें कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव कराया जाएगा. संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत कहा गया है कि संविधान का मसौदा 243 ई के तहत ज्यादातर पांच साल तक ही सीमित होता है, जो अपनी पहली बैठक में शामिल होता है। इस समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है इसलिए चुनाव से पहले नामांकन रद्द होना।18 मार्च 2026 को लखनऊ में एक बातचीत में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में 12 जुलाई तक तीन राजनीतिक सांप्रदायिक राज चुनाव संपन्न होंगे। सरकार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगली कैबिनेट बैठक में मुलायम आयोग का गठन किया जाएगा और इसके बाद 12 जुलाई 2026 तक पंचायत चुनाव कराया जाएगा। मंत्री का कहना है कि ग्राम प्रधान, जिला जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और पंचायत अध्यक्ष जैसे सभी पदाधिकारियों का पद 12 जुलाई तक है इसलिए वे पहले ही चुनाव करा लें। उन्होंने यह भी साफ कहा कि चुनाव में कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है और सरकार के साथ राज्य विद्युत आयोग भी पूरी तैयारी में है।कोर्ट ने सभी सितारों की बात सुनने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन आयोग से साफा जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि 19 फरवरी 2026 को आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर चुनाव पूरा किया जा सकता है या नहीं? साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि 26 मई 2026 को होने वाले चुनाव में बदलावों को देखा जाना चाहिए या उन्हें पहले जाना चाहिए था।अगली समीक्षा की तारीख तय
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब 25 मार्च को दोपहर 2 बजे से फिर सुनवाई होगी। यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदा की डिवीजन बेंच ने दिया है। उच्च न्यायालय की टिप्पणी और नियुक्ति पत्र की समय सीमा को देखने से यह स्पष्ट है कि यूपी में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया मई-जून में ही पूरी हो जाएगी। अब देखिए 25 मार्च की अगली सुनवाई जब सरकार और आयोग को अपनी स्थिति साफ करनी होगी।