उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 44 BAMS छात्रों का नामांकन रद्द, 4 साल बाद भविष्य पर संकट
देहरादून के शिवालिक इंस्टीट्यूट में अध्ययनरत 2019-20 बैच के छात्रों का बिना सूचना नामांकन निरस्त, अभिभावकों ने कुलपति से की मुलाकात
देहरादून | दिनांक: 19 मार्च 2026, केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ |
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पिछले चार वर्षों से अध्ययनरत BAMS 2019-20 बैच के 44 छात्र-छात्राओं का नामांकन अचानक रद्द कर दिया गया। ये सभी छात्र देहरादून स्थित शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च, झाझरा में अध्ययन कर रहे थे।
बताया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मई 2025 में बिना किसी पूर्व सूचना के छात्रों का नामांकन निरस्त कर दिया गया, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन छात्र-छात्राओं ने पिछले चार वर्षों में नियमित रूप से परीक्षा शुल्क जमा किया तथा विश्वविद्यालय ने वर्ष 2021 में उनका विधिवत नामांकन कर प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कर परिणाम भी घोषित किए।
इतना ही नहीं, चतुर्थ वर्ष की लिखित परीक्षाएं नवंबर 2024 में और प्रायोगिक परीक्षाएं दिसंबर 2024 में सफलतापूर्वक संपन्न करवाई जा चुकी थीं, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किए गए।
जब परीक्षा परिणाम जारी नहीं हुए, तो 25 फरवरी 2026 को अभिभावकों का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला, जहां उन्हें जानकारी मिली कि मई 2025 में ही छात्रों का नामांकन रद्द कर दिया गया था।
इस प्रकरण में एक और विसंगति सामने आई है कि इसी सूची के कुछ छात्रों का परीक्षा परिणाम 11 अगस्त 2025 को घोषित भी कर दिया गया, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिनांक 18 मार्च 2026 को अभिभावकों का प्रतिनिधिमंडल पुनः कुलपति डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी से मिला। कुलपति ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और इस पर विधिक राय (Legal Advice) ली जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकरण का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि नामांकन रद्द करने के आदेश को निरस्त कर न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शेष परीक्षाएं संपन्न कराई जाएं और जिन छात्रों की परीक्षाएं हो चुकी हैं, उनके परिणाम शीघ्र घोषित किए जाएं।
कुलपति डॉ. त्रिपाठी ने भी स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे और विधिक सलाह के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने न केवल 44 छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।