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जांगिड़ समाज सेवा समिति पाली द्वारा अमावस्या तिथि लागूं होते ही प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर में पूजा अर्चना।

जांगिड़ समाज सेवा समिति पाली द्वारा अमावस्या लागू होते ही प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर में पूजा अर्चना।

पाली बुधवार 18 मार्च चतुर्दशी को 8:30 बजे जैसे ही चैत्रवदी अमावस्या लागू हुई पाली का प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर घंटा घड़ियाल थाली मुद्गल की आवाज़ एवं आरती की स्वर लहरियो और भगवान विश्वकर्मा के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्री विश्वकर्मा जांगिड़ समाज सेवा समिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहनलाल जांगिड़ के कार्यकाल की पहली अमावस्या होने के कारण कार्यकारिणी सदस्यों समाज के बुजुर्गो और विश्वकर्मा एकता फ़ोर्स के युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। आलम यह था की मंदिर में पांव रखने को भी जगह नहीं थी।

प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि समिति अध्यक्ष मोहनलाल जांगिड़ के निर्देशन में सचिव ओमप्रकाश जांगिड़ एवं कोषाध्यक्ष अमरचंद शर्मा के नैतृत्व मे पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों तथा एकता फ़ोर्स के युवाओं ने सृष्टि रचयिता देवाधिदेव भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा अर्चना कर समाज एवं राष्ट्र की एकता और सुख शांति की मंगलकामना की गई।

इस अवसर पर समिति अध्यक्ष मोहनलाल जांगिड़, उपाध्यक्ष शेषाराम पारखवड, सचिव ओमप्रकाश जांगिड़, कोषाध्यक्ष अमरचंद शर्मा, संगठन मंत्री ऋषिराज त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष चम्पालाल नागल, भूराराम छड़ियां, कार्यकारिणी सदस्य प्रकाशचंद्र पिडवा, राजेंद्र जोपिग, चम्पा लाल जयपालियां, मोहनलाल देवाण, भंवरलाल सायल, अशोक किंजा, मदनलाल वाणेचा, गोरधन लाल सायल, वरिष्ठ नागरिक बाबुलाल डिगरना, गंगाराम नागल, एवं विश्वकर्मा एकता फ़ोर्स से दिपक झालुडियां, महेन्द्र वाणेचा, प्रवीण बैगड, जगदीश बरडवा, कालुराम बरडवा, महेन्द्र चवलेरा, सुनिल जोपिग, विवेक जिलोया, हेमन्द्र सांड, रमेश गुगरियां, भरत बरडवा, हनुमान धामु, सुखदेव, रमेश डिगोरियां, रुपेश जोपिग, रमेश नागल, प्रवीण नागल सहित कई जने मौजूद रहे।

रिपोर्ट -घेवर चन्द आर्य

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