'शिक्षा का सौदागर':
चण्डी BEO कार्यालय में निगरानी का बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक;
₹17,000 की रिश्वत लेते 'गुरुजी' ही बने दलाल!
विजय कुमार ,वरिष्ठ पत्रकार
गया/नालंदा: बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीता-जागता सबूत नालंदा के चण्डी प्रखंड में देखने को मिला। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पुष्पा कुमारी के कार्यालय कक्ष से उनके खासमखास संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा को ₹17,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
जब 'रक्षक' ही दलाली पर उतर आएं!
नालंदा के चण्डी प्रखंड में जो हुआ, वह केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग के उस खोखले तंत्र का एक्सरे है, जहाँ एक शिक्षक (परिवादी) को अपने हक की 'वार्षिक वेतन वृद्धि' और 'अंतर वेतन' (Arrear) के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
विडंबना देखिए, जिस वेतन वृद्धि पर उस शिक्षक का कानूनी हक था, उसे 'उपहार' की तरह देने के बदले प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने रिश्वत की मांग की।
भ्रष्टाचार का नया 'प्रोक्सी मॉडल':
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू BEO पुष्पा कुमारी की कार्यशैली है। निगरानी ब्यूरो की जांच में सामने आया कि मैडम ने खुद पैसा न छूकर, अपने अधीनस्थ 'संसाधन शिक्षक' मनोज कुमार वर्मा को 'कैशियर' बना रखा था।
यह उस 'प्रोक्सी करप्शन' का उदाहरण है, जहाँ बड़े अधिकारी सीधे हाथ गंदे करने के बजाय छोटे कर्मचारियों को ढाल बनाकर वसूली का सिंडिकेट चलाते हैं।
शिक्षा विभाग या 'वसूली केंद्र'?
एक शिक्षक का काम छात्रों का भविष्य संवारना है, लेकिन चण्डी संसाधन केंद्र में शिक्षक 'वसूली एजेंट' की भूमिका में पाए गए। जब ज्ञान के मंदिर में ही वेतन और एरियर की फाइलें 'गांधी छाप' नोटों के बिना नहीं सरकतीं, तो उस विभाग से नैतिक शिक्षा की उम्मीद करना बेमानी है।
निगरानी की दबिश और न्याय की उम्मीद:
निगरानी ब्यूरो के DSP अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी और उनकी टीम की यह कार्रवाई उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है जो यह सोचते हैं कि वे बिचौलियों के जरिए बच निकलेंगे।
शिक्षक इस कार्रवाई का पुरजोर स्वागत करता है और सरकार से मांग करता है कि केवल दलालों पर नहीं, बल्कि इस रैकेट की मास्टरमाइंड BEO पुष्पा कुमारी पर भी ऐसी कठोर कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई अधिकारी शिक्षक का हक मारने की जुर्रत न करे।