जौनपुर: मस्जिद जन्नतुल फलाह में तरावीह के दौरान कुरआन मुकम्मल, रूहानी माहौल में हुई खास दुआ
जौनपुर: मस्जिद जन्नतुल फलाह में तरावीह के दौरान कुरआन मुकम्मल, रूहानी माहौल में हुई खास दुआ
रमज़ानुल मुबारक की बरकतों और रहमतों के बीच गयासपुर नोनारी मानी कलां स्थित मस्जिद जन्नतुल फलाह में तरावीह की नमाज़ के दौरान पूरे अकीदत व एहतराम के साथ कुरआन-ए-पाक मुकम्मल किया गया। इस मुक़द्दस मौके पर मस्जिद का माहौल बेहद रूहानी, पुरनूर और दिलों को सुकून देने वाला नजर आया। बड़ी तादाद में नमाज़ियों ने तरावीह की नमाज़ में शिरकत की और अल्लाह तआला के हुज़ूर गिड़गिड़ाकर दुआएं मांगीं।
इस अवसर की खास बात यह रही कि हाफिज डॉक्टर मोहम्मद अशरफ़ पिछले 12 वर्षों से लगातार इसी मस्जिद में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन-ए-पाक सुनाने की सआदत हासिल कर रहे हैं। उनकी दिलनशीं, पुरसोज़ और खूबसूरत तिलावत ने नमाज़ियों के दिलों में कुरआन की मोहब्बत और भी गहरी कर दी।
इस मौके पर बयान करते हुए उलेमा ने कहा कि कुरआन शरीफ अल्लाह तआला की आखिरी और मुकम्मल किताब है, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, रहनुमाई और कामयाबी का रास्ता दिखाती है। रमज़ान का मुबारक महीना कुरआन से खास ताल्लुक रखता है, क्योंकि इसी पाक महीने में कुरआन नाज़िल हुआ। इसलिए रमज़ान में कुरआन की तिलावत करना और उसे सुनना बेहद अज़ीम सवाब और बरकत का जरिया है।
उन्होंने आगे कहा कि तरावीह की नमाज़ सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, और इसमें पूरे कुरआन को सुनना और सुनाना मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी नेमत और फजीलत की बात है।
कुरआन मुकम्मल होने के बाद मस्जिद में खास दुआ कराई गई, जिसमें मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक्की, खुशहाली और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमाह की सलामती व भलाई के लिए अल्लाह तआला से खास दुआएं मांगी गईं।
इस मौके पर मोहम्मद दानिश, सलीम, रसीद, अबूसाद, अजीम, शाहिद, ताबिश समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कुरआन मुकम्मल होने की खुशी में सभी ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी और रमज़ान की बरकतों के लिए अल्लाह का शुक्र अदा किया।