विशेष नोट:- तीन पार्ट फॉरवार्ड बैकवर्ड एस सी एसटी यू जी सी बिल पर।
समाज के विभिन्न वर्गों—फॉरवर्ड, अपने हक के लिए बराबर आगे रहता है।
बैकवर्ड, अपने हक के लिए बराबर पीछे रहता है इसलिए बैकवर्ड है पीछे है
एससी और एसटी— अपने हक के लिए कोई मतलब नहीं रखता इसलिए मुख्य धारा से बिल्कुल अलग रहता है
समाज के व्यवहार और सोच में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। यह अंतर केवल सामाजिक स्थिति का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और हितों के प्रति जागरूकता और सक्रियता का भी है।
फॉरवर्ड वर्ग हमेशा अपने हितों के प्रति सजग और संगठित रहता है। जब भी उनके अधिकारों या सुविधाओं पर कोई प्रभाव पड़ता है, वे तुरंत एकजुट होकर आवाज उठाते हैं और आंदोलन के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुँचाते हैं। हाल ही में सरकार द्वारा लाए गए लेटेस्ट यू जी सी बिल के विरोध में फॉरवर्ड वर्ग की सक्रियता इसका स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ उन्होंने जगह-जगह आंदोलन कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
वहीं दूसरी ओर, बैकवर्ड वर्ग अक्सर अपने ही हितों के मुद्दों पर अपेक्षित स्तर की एकजुटता और सक्रियता नहीं दिखा पाता। कई बार वे समर्थन देने तक में पीछे रह जाते हैं, जिसका सीधा नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ता है।
एससी और एसटी वर्ग की स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है, जहाँ कई मामलों में उदासीनता या दूरी देखने को मिलती है। अपने अधिकारों और अवसरों के प्रति जागरूकता की कमी उन्हें मुख्यधारा की निर्णायक प्रक्रियाओं से दूर कर देती है।
निष्कर्षतः, यह स्पष्ट है कि अधिकार केवल दिए जाने से सुरक्षित नहीं होते, बल्कि उनके लिए जागरूकता, एकजुटता और समय पर आवाज उठाना अत्यंत आवश्यक है। जो वर्ग जितना संगठित और सजग रहेगा, वही अपने हितों की रक्षा और विकास सुनिश्चित कर पाएगा।