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गोद लेने वाली माताओं को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 12 हफ्ते की छुट्टी अनिवार्य

अदालत ने कहा—बच्चे की परवरिश में समान जिम्मेदारी, पितृत्व अवकाश नीति बनाने के भी दिए निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले में गोद लेने वाली माताओं को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण में गोद लेने वाली मां की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी कि जैविक (Biological) मां की होती है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल प्रसव के बाद शारीरिक आराम देना नहीं है, बल्कि बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव (Bonding) स्थापित करना भी है। इसलिए गोद लेने वाली माताओं को इस अधिकार से वंचित करना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाएं, ताकि बच्चे की देखभाल में पिता की भूमिका को भी मजबूती मिल सके। यह फैसला लैंगिक समानता (Gender Equality) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से गोद लेने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा मिलेगा और समाज में दत्तक ग्रहण को लेकर सकारात्मक सोच विकसित होगी। साथ ही कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को भी मजबूती मिलेगी।

इस फैसले के बाद अब सभी सरकारी और निजी संस्थानों को निर्देशों का पालन करना होगा, जिससे गोद लेने वाली माताओं को भी समान अधिकार और सुविधाएं मिल सकें।

निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करता है, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और पारिवारिक संतुलन को भी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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