logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

बीनणी, आप पढ़ो…” ससुर के इन शब्दों ने बहू को बना दिया जज

“बीनणी, आप पढ़ो…” ससुर के इन शब्दों ने बहू को बना दिया जज

कभी ससुराल में घर के काम करती बहू…
आज जज बनकर न्याय की कुर्सी तक पहुंच गई।

यह प्रेरक कहानी है दीपू कंवर की, जो बाड़मेर की बहू और जामनगर की बेटी हैं।
उन्होंने ससुराल में ही एक छोटे से कमरे को हॉस्टल बना लिया और दिन-रात पढ़ाई करके आखिरकार गुजरात न्यायिक सेवा में चयन हासिल कर लिया।

लेकिन इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत बने उनके ससुर।

जब भी दीपू घर का काम करने लगतीं,
ससुर प्यार से डांटते हुए कहते —

“बीनणी से काम क्यों करवा रहे हो… बीनणी, आप पढ़ो।”

शादी, बच्ची और फिर भी नहीं टूटा सपना

करीब 7 साल पहले दीपू की शादी बाड़मेर जिले के जालीपा गांव के लोकेंद्र सिंह से हुई थी। आज वह एक बेटी की मां भी हैं।

घर, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच
न्यायिक सेवा की तैयारी आसान नहीं थी।

दीपू ने लगातार तीन बार परीक्षा दी
और तीसरे प्रयास में जाकर सफलता मिली।

ससुराल ही बना हॉस्टल

तैयारी के दौरान उन्होंने ससुराल में ही
एक कमरे को हॉस्टल जैसा बना लिया,
जहां वह दिन-रात पढ़ाई करती थीं।

परिवार ने भी उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी
और हर कदम पर साथ दिया।

आज दीपू कंवर की कहानी सिर्फ एक सफलता नहीं…
यह उस सोच की जीत है
जहां बहू को जिम्मेदारी नहीं, सपना पूरा करने का मौका दिया जाता है।

क्योंकि कभी-कभी
एक ससुर का भरोसा…
एक बेटी को जज बना देता है।

0
4743 views

Comment