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असम विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जारी की गई :

असम विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जारी की गई दूसरी उम्मीदवार सूची ने राज्य की राजनीति में नई बहस और चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

इस सूची के सामने आते ही पार्टी के भीतर टिकट वितरण की प्रक्रिया और नेतृत्व की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर तब जब पार्टी के युवा नेतृत्व से जुड़े दो प्रमुख चेहरे अमन वदूद और रीटम सिंह को टिकट नहीं दिया गया। अमन वदूद और रीटम सिंह दोनों को कांग्रेस की उभरती हुई युवा टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। पार्टी के डिजिटल अभियान, शोध आधारित रणनीति और संगठनात्मक संवाद को मजबूत करने में इनकी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। यही कारण है कि इन दोनों नेताओं को टिकट न दिए जाने से पार्टी के अंदर और बाहर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस वास्तव में नए और युवा नेतृत्व को पर्याप्त अवसर दे रही है या नहीं। 14 मार्च को जारी की गई उम्मीदवारों की सूची के अनुसार कांग्रेस ने तिनसुकिया विधानसभा क्षेत्र से असम यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष देबिद फुकन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। देबिद फुकन को पार्टी के सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है, जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े हुए हैं। वहीं चामरिया विधानसभा सीट से पार्टी ने चायगांव के तीन बार विधायक रह चुके अनुभवी नेता रेकिबुद्दीन अहमद को उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार चुनाव में अनुभव और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर रही है। हालांकि युवा नेताओं को टिकट न मिलने के फैसले ने पार्टी की रणनीति को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि कांग्रेस को भविष्य की राजनीति में मजबूत स्थिति बनानी है तो उसे युवा नेतृत्व को भी अधिक अवसर देने होंगे।इसी बीच पार्टी सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन में कई स्तरों पर विचार-विमर्श और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखा गया है। कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी अनुभवी नेताओं और नई ऊर्जा दोनों के संतुलन के साथ मैदान में उतरना चाहती है। दूसरी सूची के सामने आने के बाद अब राज्य की राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज हो गई हैं। आगामी दिनों में अन्य दलों की रणनीति और उम्मीदवारों की घोषणा के साथ असम की चुनावी राजनीति और भी दिलचस्प होती दिखाई दे रही है।

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