झालावाड़ नगर परिषद में भारी अव्यवस्था: वेतन न मिलने से नाराज सफाई कर्मचारियों ने जड़ा ताला
झालावाड़ | 16 मार्च 2026
झालावाड़ नगर परिषद इन दिनों भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का केंद्र बनी हुई है। शहर में न तो अवैध निर्माणों पर लगाम लग पा रही है और न ही आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। इसी अव्यवस्था के विरोध में आज नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया।
वेतन संकट: 3 माह से खाली हाथ कर्मचारी
आज सुबह नगर परिषद के मुख्य द्वार पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब CLC (कन्वर्जेंस लेबर कॉन्ट्रैक्ट) के माध्यम से नियोजित सफाई कर्मचारियों ने परिषद के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। * मुख्य कारण: कर्मचारियों को पिछले 3 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
असमंजस की स्थिति: CLC का टेंडर खत्म हो चुका है, जिसके कारण कर्मचारियों को यह भी नहीं पता कि वे अभी सेवा में नियोजित हैं या नहीं।
अधिकारियों की चुप्पी: प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
राजस्व को चपत और प्रशासनिक मिलीभगत
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों और जानकारों ने बताया कि परिषद की लापरवाही से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है:
अवैध निर्माण: शहर में बिना निर्माण स्वीकृति (Building Permission) के धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी हैं।
अतिक्रमण का खेल: जिन जगहों से पूर्व में अतिक्रमण हटाया गया था, वहां कथित मिलीभगत के चलते दोबारा कब्जे करवा दिए गए हैं।
PM आवास योजना में देरी: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए आवासों का आवंटन लंबे समय से अटका हुआ है, जिससे पात्र लाभार्थी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
अवैध कॉलोनियां: शहर के चारों ओर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछ रहा है, लेकिन परिषद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
"हम भूखे पेट काम कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर हमारी सुध लेने को तैयार नहीं हैं। जब तक वेतन नहीं मिलता और हमारी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, यह ताला नहीं खुलेगा।" — प्रदर्शनकारी कर्मचारी
आगे क्या?
फिलहाल नगर परिषद में कामकाज पूरी तरह ठप है। यदि जल्द ही प्रशासन ने हस्तक्षेप कर वेतन का भुगतान और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। शहर की सफाई व्यवस्था चरमराने की पूरी आशंका बनी हुई है।