logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

“आदिवासी अस्मिता का हुंकार: शहीदों की विरासत याद दिलाते हुए ‘ये जंग की शुरुआत का संदेश”

सिद्धो-कान्हू, बिरसा मुंडा और तिलका माझी की वीरता को याद कर युवाओं ने दिखाई एकजुटता, संघर्ष की चेतावनी

विस्तृत समाचार:
झारखंड में आदिवासी समाज के बीच अपनी पहचान, हक और अधिकारों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद होती नजर आ रही है। “ये जंग की शुरुआत है” जैसे तीखे और भावनात्मक संदेश के साथ समाज के युवाओं ने अपने पूर्वजों की वीरता और बलिदान को याद करते हुए संघर्ष के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है।

इस संदेश में साफ तौर पर कहा गया कि भले ही तीर-धनुष चलाना आज कम हो गया हो, लेकिन उसे चलाना भूले नहीं हैं। यह प्रतीकात्मक रूप से इस बात को दर्शाता है कि आदिवासी समाज अपनी परंपरा, ताकत और संघर्ष की भावना आज भी जिंदा रखे हुए है।

संदेश में इतिहास के उन महान योद्धाओं को याद किया गया, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्हें झुकने पर मजबूर किया। सिद्धो-कान्हू, बिरसा मुंडा, तिलका माझी, फूलो-झानो और गंगा नारायण सिंह जैसे वीरों का जिक्र करते हुए कहा गया कि आज भी वही खून बह रहा है, जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होना जानता है।

समाज के लोगों ने “जोहार” के साथ अपनी एकजुटता और गर्व का प्रदर्शन किया। यह संदेश न केवल इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि वर्तमान में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और संगठित रहने का भी आह्वान करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश समाज में जागरूकता और एकता को मजबूत करते हैं, साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का काम भी करते हैं।

0
77 views

Comment