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चैत्रनवरात्र एवं नवसंवत्सर गुड़ीपड़वा 2026 l

बदनावर-धार :- AIMA Raju Gajbhiye(Sitaram) Social Media Activities )
चैत्र नवरात्र एवं नवसंवत्सर गुड़ीपड़वा 2026 –
भारतीय संस्कृति में संपूर्ण वर्ष तीज - त्यौहारो का हैं । 365 दिन में 366 दिन त्यौहार मनाए जाते हैं । इसके लिऐ कहावत हैं कि ‘‘ सात वार और आठ त्यौहार । चैत्र मास की अमावस के अगले दिन से ‘‘ चैती नवरात्रे ’’ या नौव्रते शुरु हो जाते हैं, इस दिन को हम नवसंवत्सर यानी नऐ वर्ष के रुप में भी मनाते हैं । भारतीय विक्रम संवत इसी दिन में आरंभ होता हैं । गुड़ी पडवा को हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता हैं ।
नवरात्रे साल में 2 बार आते हैं । चैत्र में वासंती नवरात्रे और अश्विन में शारदीय नवरात्रे । दोनों ऋतुओं के संधिकाल में मनाए जाते हैं । इसका वैज्ञानिक आधार पर विश्लेषन किया जाए , तो ये ऋतु परिवर्तन के लिए तैयार हो जाने की सूचना देते हैं । इन व्रतों द्वारा अपने शरीर की क्रिया प्रणाली को आनेवाली कठीन गरमी - सरदी के लिए तैयार करते हैं ।

- चैत्र मास में गेहूं - चावल की फसल तैयार हैं , मां दूर्गा से व्रत - पूजा द्वारा शक्ति मांगते हैं ।
- नववर्ष में रसोई की साफ - सफाई कर उसमें मां अन्नपूर्णा के नाम से नयी सामग्री भरी जाती हैं ।
- अष्टमी - नवमी को कन्या पूजन करके कन्याओं को भोजन व दक्षिणा दी जाती हैं । कहते हैं 8 वर्षीय कन्या गौरी का रुप होती हैं । इसलिए कन्याओं को देवी के रुप में पूजा - अर्चना की जाती हैं ।
- इन दिनों वैष्णो देवी की यात्रा करने का भी चलन हैं , पंजाब में यह यात्रा बहुत प्रचलित हैं ।
- महाराष्ट्र में इस दिन पहले नवरात्र को ‘‘गुड़ी पड़वा’’ के रुप में मनाते हैं । यह भी नववर्ष को घोतक हैं ।
- 8 दिन की पूजा से हमारे आध्यात्मिक और शारीरिक दोषों का शमन होता हैं । इसके बाद रामनवमी
त्यौहार मनाया जाता हैं । पहले अष्टमी के दिन हलवा-पूरी और नवमी पर खीर-पूरी नयी सामग्री से बनायी जाती हैं ।
- ऐसी मान्यता भी है कि नवरात्र के पहले दिन नीम की 7 कोपले खाली पेट चबाकर खाने से सालभर चर्म रोग से बचाव होता हैं । पूरे 9 दिन खायी जाए तो रक्त शुद्धि होगी व कैसर से भी बचाव होगा । नीम में क्लोरोफिल होता हैं , जो दांतों के लिए लाभदायक होता हैं ।
आरोग्य व सौभाग्य प्राति के लिए - देही सौभाग्यमारोग्य देहि में परमं सुखम । रुप देहि जयं देहि
यशो देहि द्धिषो जहि ।।
चैत्र नवरात्र 2026 की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा. नवरात्र के पहले दिन यानी 19 मार्च को घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी, जिससे मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत मानी जाती है.

गुड़ी पड़वा 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा, जो हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत का प्रतीक है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि भी शुरू होती है। इस दिन घरों में गुड़ी ध्वज लगाया जाता है, रंगोली बनाई जाती है और पूरन पोली जैसे पकवान बनाए जाते हैं।यह पर्व नई शुरुआत और सकारात्मकता का संदेश देता है।
गुड़ी पड़वा का त्योहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यही तिथि हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत मानी जाती है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू होती है। यह पर्व खासतौर पर महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
ड्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 20 मार्च 2026 को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए गुड़ी पड़वा का पर्व गुरुवार, 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों में गुड़ी (विजय ध्वज) स्थापित की जाएगी।
गुड़ी पड़वा 2026 शुभ मुहूर्त
•ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
•विजय मुहूर्त – दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक
•गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक
•निशिता मुहूर्त – रात 12:05 बजे से 12:52 बजे तक
गुड़ी पड़वा कैसे मनाते हैं?
•इस दिन सुबह स्नान करने के बाद नए कपड़े पहने जाते हैं।
•घर के मुख्य द्वार पर ‘गुड़ी’ लगाई जाती है। यह एक बांस की डंडी पर रेशमी कपड़ा, नीम की पत्तियां, फूलों की माला और ऊपर उल्टा रखा हुआ तांबे का कलश लगाकर बनाई जाती है।
•घर के आंगन और मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई जाती है।
•महाराष्ट्र में इस दिन पूरन पोली (गुड़ और चने की दाल से बनी रोटी) खास तौर पर बनाई जाती है।
•इसके अलावा साबूदाना की खीर, श्रीखंड और पूरी-चना का प्रसाद भी बनाया जाता है।
•नए साल की शुरुआत शुभ बनाने के लिए दान-पुण्य भी किया जाता है।
गुड़ी पड़वा का महत्व
गुड़ी पड़वा मराठी नववर्ष का प्रतीक है और इसका धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व भी बहुत बड़ा माना जाता है। यह त्योहार नए साल की शुरुआत के साथ जीवन में नई उम्मीद, सकारात्मक ऊर्जा और प्रगति का संदेश देता है।
मान्यता है कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि को ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए गुड़ी पड़वा को सिर्फ सांस्कृतिक त्योहार ही नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन घर के बाहर लगाई जाने वाली गुड़ी ध्वज को सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति आती है।

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