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LPG रिफिल घोटाला: डिजिटल रिकॉर्ड में 'भूतिया' डिलीवरी का खेल, 3 मिनट में दो सिलेंडर बुक पर पासबुक में एक भी नहीं

विकासनगर (देहरादून)। उत्तराखंड में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सीधे तौर पर डिजिटल सिस्टम में सेंधमारी और संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। विकासनगर तहसील के ग्राम पंचायत आदू वाला में इंडेन गैस के एक उपभोक्ता के साथ हुए इस फर्जीवाड़े ने अनमोल गैस एजेंसी, हरबर्टपुर की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है।

आरोप है कि एजेंसी ने उपभोक्ता के डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर ऐसी रिफिल दर्ज की हैं, जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व ही नहीं है।

​पीड़ित ग्राहक इंद्रपाल द्वारा जुटाए गए साक्ष्य इस घोटाले की गहराई को बयां करते हैं। ग्राहक की मैन्युअल पासबुक में वर्ष 2023 से 2026 तक कुल 33 रिफिल एंट्रीज दर्ज हैं, जो बाकायदा ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद डिलीवरी बॉय द्वारा की गई थीं। लेकिन चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब 'Indane' ऐप और ऑनलाइन पोर्टल पर जांच की गई, जहाँ कुल 45 एंट्रीज दिखाई दे रही हैं। यानी रिकॉर्ड में 12 अतिरिक्त सिलेंडर दर्ज कर दिए गए, जो उपभोक्ता को कभी मिले ही नहीं।

​इस फर्जीवाड़े की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई 18 मई 2025 के रिकॉर्ड में छिपी है। ऑनलाइन सिस्टम के अनुसार, इस तारीख को सुबह 11:50 बजे और फिर महज 3 मिनट बाद 11:53 बजे दो-दो बुकिंग और डिलीवरी दर्ज कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि जहाँ ऑनलाइन रिकॉर्ड में 3 मिनट के भीतर दो सिलेंडर 'डिलीवर' दिखाए जा रहे हैं, वहीं उपभोक्ता की मैन्युअल पासबुक में 18 मई की एक भी एंट्री दर्ज नहीं है। यह तकनीकी रूप से असंभव है कि सिस्टम 15 दिन के अनिवार्य अंतराल के नियम को तोड़कर 3 मिनट में दो बुकिंग स्वीकार कर ले, और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि बिना पासबुक में दर्ज किए और बिना फिजिकल डिलीवरी के ये सिलेंडर कागजों में कहाँ 'गायब' कर दिए गए?

​जब इस विसंगति को लेकर स्थानीय खाद्य पूर्ति अधिकारी से शिकायत की गई, तो न्याय के बजाय उपभोक्ता को यह कहकर टाल दिया गया कि "बुकिंग आपके फोन से मिस कॉल के जरिए हुई है।" इस गैर-जिम्मेदाराना तर्क ने विभाग की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ता का सीधा सवाल है कि क्या विभाग यह मान रहा है कि मिस कॉल मात्र से सिलेंडर हवा में डिलीवर हो जाते हैं? और क्या विभागीय अधिकारी इन फर्जी प्रविष्टियों की गहराई से जांच करने के बजाय भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण दे रहे हैं?

​इंद्रपाल ने इस संबंध में विकासनगर एसडीएम और जिला प्रशासन से भी गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जहाँ एक तरफ जिलाधिकारी देहरादून कालाबाजारी रोकने के लिए टीमें गठित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के डिजिटल डेटा के साथ सरेआम छेड़छाड़ हो रही है। यदि एक जागरूक उपभोक्ता के खाते से 12 सिलेंडर कागजों में चोरी किए जा सकते हैं, तो कम पढ़े-लिखे और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों उपभोक्ताओं के नाम पर कितने बड़े पैमाने पर गैस की कालाबाजारी हो रही होगी, यह जांच का विषय है।

फिलहाल पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और आईओसीएल (IOCL) से उच्च स्तरीय जांच और डिजिटल ऑडिट की मांग की है।

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