Cennnai relve
आम हड़ताल के तहत, सर्वहारा वर्ग की भावना, हथौड़े का लाल झंडा लिए हुए, आज तिरुवेट्टियूर रेलवे ट्रैक की नसों में संघर्ष की आवाज की तरह बह निकली!
अपने अधिकारों की रक्षा के लिए श्रमिकों के इस मार्च ने रेलवे के दैनिक कामकाज को बाधित कर दिया!
आप ऐसे चार कानून बना सकते हैं जो श्रमिकों के जीवन को कॉरपोरेट गिद्धों के लालच का शिकार बना देंगे!
ये वे तरीके हैं जिनसे वैश्वीकरण के जहरीले दांत हमारे जीवन को कुरेदते हैं!
लेकिन यह मत भूलिए कि इन रेल पटरियों की रगों में भी श्रम दौड़ता है!
ध्यान से देखो, अरुवल के हथौड़े से उकेरा गया लाल झंडा उस गर्जना करती ट्रेन को रोक रहा है!
मेरे सामने चल रही ट्रेन के ड्राइवर की उंगलियां कांप रही हैं...
क्योंकि, उसके सामने उसका वर्गीय रक्त है! विश्वभर में सर्वहारा वर्ग का एक व्यक्ति दूसरे सर्वहारा वर्ग के श्रम के संघर्ष की भाषा को इसी प्रकार समझता है!
यह मशीनें नहीं हैं... बल्कि कड़ी मेहनत का पसीना है जो दुनिया को चलाता है!यह मशीनें नहीं हैं... बल्कि कड़ी मेहनत का पसीना है जो दुनिया को चलाता है!
अगर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो दुनिया की रफ्तार रुक जाएगी! अगर हम श्रम करना बंद कर दें तो तुम्हारा ब्रह्मांड निर्जीव हो जाएगा! जी हाँ, जिसे तुम कानूनों से कायम रखते हो वह कॉर्पोरेट वैश्वीकरण है! जिसे हम लाल झंडे से कायम रखते हैं वह सर्वहारा वैश्वीकरण है! आओ, श्रम के लिए हाथ उठाएँ! आओ, अधिकारों के लिए हाथ उठाएँ! संघर्ष की जीत हो!