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सी एल गुप्ता नेत्र संस्थान में किया गया 9th नेशनल लो विजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन।

मुरादाबाद। सी एल गुप्ता नेत्र संस्थान में 9th नेशनल लो विजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
इस कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में आरपी सेंटर एम्स,नई दिल्ली से प्रोफेसर सूरज सेंजम रहे, सूरज जी ने बताया कि वर्तमान समय में हमारी आबादी का एक प्रतिशत आज भी आंशिक एवं पूर्णतया अंधता का शिकार है
जो कि हमारे समाज और देश पर एक बड़ी जिम्मेदारी की तरह है।
इसके निराकरण हेतु न केवल बड़ी संस्थाओं के द्वारा लगातार एडवांस उपकरण आदि के माध्यम से लो विजन से लड़ने की क्षमता को विकसित किया जा रहा है बल्कि काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है आपके द्वारा बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कुछ ऐसे उपकरण मौजूद हैं जिनके इस्तेमाल से लो विजन के मरीज को देखने में बहुत ही सुविधा होती है, जिसे वह अपने रोजमर्रा के सभी कार्य आसानी से कर पाते हैं,
यूपीयूएमएस सैफई से आए डॉक्टर आदित्य त्रिपाठी ने बताया कि लो विजन के मरीजों का रेफरेक्शन एवं असेसमेंट किस प्रकार करना चाहिए, इसमें उपयोग होने वाले सभी चरणों के बारे में आपके द्वारा व्याख्या की गई।
असिस्टेंट प्रोफेसर एमिटी यूनिवर्सिटी सुगंधा जी ने बताया कि अंधता एक ग्लोबल समस्या बनकर सबके सामने आ रहा है और भारत में बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
सुगंधा ने बताया की ऐसे व्यक्तिओं को खेल, संगीत एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से बेहतर तरीके से जीवन जीने की कला को विकसित किया जाता है।
वक्ता के रूप में सी एल गुप्ता नेत्र संस्थान के ऑप्टोमेट्री हेड श्री फनी कृष्ण ने लो विजन डिपार्मेंट का परिचय देते हुए सभी को बताया कि हमारे संस्थान में नेत्र परीक्षण के उपरांत लो विजन या पूर्णतया अंधता वाले मरीजों की अलग से जांच की जाती है एवं जरूरत पड़ने पर उन्हें विभिन्न प्रकार की सहायक सेवाओं के माध्यम से सहयोग किया जाता है और अंत में रिहैबिलिटेशन के लिए रेफर किया जाता है
लो विजन डिपार्टमेंट के पास ऐसे मरीजों की बेहतर दृष्टि के संयोजन के लिए विभिन्न प्रकार की आधुनिक तकनीक से युक्त डिवाइसेज मौजूद हैं।
हिमांशु सिंह के द्वारा लो विजन के मरीजों को किस प्रकार देखा जाता है एवं उनकी कौन-कौन सी जांच एवं कौन से मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है, इस पर चर्चा की गई।
संस्था की स्पेशल एजुकेटर आसमा ने अपनी प्रेजेंटेशन के माध्यम से सभी को बताया कि काउंसलिंग इस प्रक्रिया का एक विशेष अंग है, काउंसलिंग न केवल मरीज की बल्कि उसके परिवार की भी होनी आवश्यक है।
साथ ही ऐसे मरीज जो जीने की आशा छोड़ चुके हैं उनको रिहैबिलिटेशन से जोड़कर वापस आत्मविश्वास से भरा जा सकता है,
संस्था के लो विजन एक्सपर्ट सुनील चौहान के द्वारा लो विजन डिपार्टमेंट के साथ जुड़ी अन्य सपोर्ट सर्विसेज के बारे में जानकारी दी गई और कार्यक्रम के अंतिम चरण में कौशिकी एवं कातीया ने लो विजन के उपकरणों के इस्तेमाल का डेमोंसट्रेशन दिया।
संस्था की चेयरपर्सन डॉ आशि खुराना ने बताया कि हमारे संस्थान में लगभग 2000 मरीजों का इलाज चल रहा है और उनमें से कई मरीजों को रिहैबिलिटेशन से जोड़ा गया है
संस्था के द्वारा छोटे बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उनको ब्रेल पढ़ाकर अन्य स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है तथा व्यस्क लोगों को रोजगार के साधनों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
इस कांफ्रेंस का उद्देश्य हर वर्ष यही रहता है कि पैरामेडिकल सेवाओं में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को समाज की इस बढ़ती हुई आवश्यकता की ओर ध्यान केंद्रित कराया जाए तथा उन्हें नई तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।
हर वर्ष संस्थान में ऐसे करीबन 100 छात्र-छात्राओं को इस कांफ्रेंस के माध्यम से जागरुक एवं प्रशिक्षित किया जाता है,
इस कार्यक्रम का संचालन ऑप्टोमेट्रिस्ट आफरीन ने किया संस्था की ट्रस्टी श्रीमती शिखा गुप्ता ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम का संयोजन प्रशासनिक अधिकारी गरिमा सिंह ने किया, सहायक सेवाओं में श्री अतुल विज, शर्मेंद्र बिश्नोई, बिलाल सिद्दीकी, अनिल सपरा, सुरेश, सुनील, मुन्ना सिंह, सूरज चौरसिया, राजकुमार सिंह, तस्लीम आदि का विशेष सहयोग रहा।
आइमा मीडिया संवाददाता प्रेम मसीह

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