मदरसा बंद कर समान शिक्षा लागू करने की मांग, एनकाउंटर और बुलडोजर की जरूरत नहीं पड़ेगी: अश्विनी उपाध्याय
न्यायालय के अधिवक्ता Ashwini Upadhyay ने देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि अगर मदरसों को बंद कर सभी बच्चों के लिए एक जैसी शिक्षा व्यवस्था लागू कर दी जाए तो न तो एनकाउंटर की जरूरत पड़ेगी और न ही बुलडोजर चलाने की नौबत आएगी।
अश्विनी उपाध्याय ने अपने बयान में कहा कि “प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर” यानी बीमारी होने से पहले ही उसकी रोकथाम करना बेहतर होता है। उनके अनुसार समाज में कई समस्याओं की जड़ शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव और अलग-अलग ढांचे हैं, जिन्हें समाप्त कर समान शिक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “मां के गर्भ में सभी बच्चे समान होते हैं और सभी नौ महीने ही रहते हैं, लेकिन समाज में नीचे के स्तर पर कुछ लोग ऊपर वाले के नाम पर नफरत फैलाना सिखाते हैं।”
उपाध्याय ने यह भी कहा कि देश में सभी बच्चों के लिए समान और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि समाज में एकता और भाईचारा मजबूत हो सके।
हालांकि उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग वर्गों में बहस छिड़ गई है और कई लोग इसे लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।