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टीईटी की सक्ती पर महाराष्ट्र सरकार को हरी झंडी! सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की अनुमति मिली, लाखों शिक्षकों को मिलेगी राहत!

मुंबई। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधान परिषद में चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री पंकज भोयर ने बताया कि विधि-न्याय विभाग से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे सेवारत शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
�विधान परिषद में गरमाई चर्चा
विधान परिषद सदस्य किरण सरनाईक ने लक्षवेधी प्रस्ताव के जरिए मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नौकरीपेशा शिक्षकों के लिए टीईटी की कठिनाई कम कर अलग परीक्षा होनी चाहिए, साथ ही 60-55% की बजाय 45% अंक और ज्यादा प्रयत्नों की छूट दी जाए।
� मंत्री भोयर ने जवाब दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2023 को गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों के प्राइमरी शिक्षकों (कक्षा 1-8) के लिए टीईटी अनिवार्य किया, और 31 अगस्त 2025 तक पास करने की समयसीमा थी।
�सरकार की राहत भरी पहल
शिक्षक संगठनों की चिंता के बाद सरकार ने दो साल की मोहलत दी है। अब साल में दो बार परीक्षा होगी, पहले एक बार होती थी। 2013 से अब तक 9 परीक्षाओं में पास प्रतिशत सिर्फ 2.39 से 5.07% रहा।� NCTE के दायरे में आने से राज्य का हस्तक्षेप सीमित है, लेकिन 31 अगस्त 2020 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र को विस्तृत जानकारी भेजी गई है।
�विशेषज्ञों का स्वागत
मुख्याध्यापक महामंडल के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र गणपुले ने अन्य राज्यों का उदाहरण देकर पुनर्विलोकन याचिका का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षकों के अनुभव, सेवा और प्राविण्य के आधार पर छूट की मांग की।� यह कदम महाराष्ट्र के लाखों शिक्षकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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