सिलेंडर मिल रहा है, सरकार का दावा लेकिन अफवाह की वजह से लाइन लंबी है?
सरकार ज़ोर शोर से यह साबित करने पर जुट गई है कि सिलेंडर की कमी नहीं है। कमर्शियल सिलेंडर को लेकर संकट बड़ा तो दिखता है मगर घरेलू सिलेंडर के संकट का सही अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। पाइप से जो गैस की सप्लाई है, उसमें तो अभी कोई कमी नहीं दिखती लेकिन तब फिर जगह जगह लोग सिलेंडर लेकर लाइन में क्यों लग रहे हैं? हमें नहीं भूलना चाहिए कि गैस के भीतर भी दो तीन क्लास है। एक क्लास पाइप से गैस की सप्लाई लेता है, एक क्लास सिलेंडर से और एक क्लास है जो छोटे सिलेंडर से काम करता है। सरकार की प्रेस कांफ्रेंस में भले दावा किया जा रहा है कि सब ठीक है लेकिन अंदाज़ा भी हो जाता है कि उतना ठीक नहीं है। लेकिन सिलेंडर की कमी को अफवाह साबित भी ज़्यादती है। अगर एजेंसी से सिलेंडर मिल रहा है तब भी क्या लोग अफवाह के दम पर लाइन लगाने चले जाएंगे? कितने दिनों तक भागते रहेंगे? उम्मीद है इस व्यंग्य को आप समझेंगे और पसंद करेंगे।