logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

बालेर अष्टभुजा देवी मेले में नाल दंगल का रोमांच, 131 किलो नाल उठाकर मध्यप्रदेश के सत्येंद्र गुर्जर बने ‘दंगल केसरी’ खंडार/राजू माली पत्रकार

बालेर अष्टभुजा देवी मेले में नाल दंगल का रोमांच, 131 किलो नाल उठाकर मध्यप्रदेश के सत्येंद्र गुर्जर बने ‘दंगल केसरी’

खंडार (राजू माली) बालेर में आयोजित अष्टभुजा देवी मेले के दौरान शुक्रवार को पारंपरिक नाल दंगल प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के पहलवान सत्येंद्र गुर्जर ने 131 किलोग्राम की नाल उठाकर शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘दंगल केसरी’ का खिताब अपने नाम किया।
इस रोमांचक प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के पहलवानों ने दमखम दिखाया। मुकाबले में शिवपुरी (मध्यप्रदेश) के जसवंत गुर्जर उपविजेता रहे, जबकि हाथरस (उत्तर प्रदेश) के विनीत बैरवा ने तीसरा स्थान हासिल किया।
ग्राम पंचायत की ओर से विजेता सत्येंद्र गुर्जर को 31 हजार रुपये, उपविजेता जसवंत गुर्जर को 11 हजार रुपये तथा तीसरे स्थान पर रहे विनीत बैरवा को 7100 रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता का शुभारंभ खंडार के पूर्व प्रधान गोविंद शुक्ला, ठाकुर मानवेन्द्र सिंह, ग्राम विकास अधिकारी मांगीलाल गुर्जर, सरपंच प्रतिनिधि रामवीर मीना, गुड्डू शुक्ला, भाजपा नेता भगवत सिंह जादौन, वीरबल गुर्जर और लखपत सिंह जादौन सहित अन्य गणमान्य लोगों ने पूजा-अर्चना कर किया।
मेले में आयोजित इस नाल दंगल को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे आयोजन के दौरान दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान गोविंद शुक्ला ने विजेता पहलवानों को प्रोत्साहन देने के लिए मेला कमेटी को 21 हजार रुपये की सहयोग राशि भेंट की। वहीं प्रतियोगिता के दौरान बहरावंडा कला थाना अधिकारी मदरूप गुर्जर के नेतृत्व में पुलिस जाब्ता मौजूद रहा और सुरक्षा व्यवस्था संभाली गई।
नाल दंगल में सत्यनारायण उर्फ सीतू बैसला और दशरथ सिंह ने रेफरी की भूमिका निभाई, जबकि ग्राम विकास अधिकारी मांगीलाल गुर्जर और लखपत सिंह जादौन ने प्रतियोगिता का आंखों देखा हाल सुनाकर पहलवानों का उत्साहवर्धन किया।
अष्टभुजा देवी मेले में आयोजित इस पारंपरिक प्रतियोगिता ने ग्रामीण खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी और दर्शकों को रोमांच से भर दिया

0
0 views

Comment