प्रशासन की अनदेखी या मिलीभगत? 15वें वित्त की नाली निर्माण पर उठे सवाल
सूचना का अधिकार आवेदन के एक माह बाद भी नहीं मिली जानकारी, गुणवत्ता पर उठे प्रश्न
छुरिया | नगर पंचायत छुरिया के वार्ड क्रमांक 01 में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में आ गया है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और निर्धारित मापदंडों की अनदेखी को लेकर स्थानीय नागरिकों में चर्चा के साथ नाराजगी भी देखी जा रही है।
मौके पर किए गए अवलोकन और सामने आई तस्वीरों में नाली की दीवारों की मोटाई कई स्थानों पर असमान नजर आ रही है। वहीं कुछ जगहों पर प्लास्टरिंग भी कमजोर दिखाई दे रही है। दीवार की मोटाई कम होने की बात सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
4 इंच की जगह 3 इंच दीवार बनाने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन में नाली की दीवार की मोटाई 4 इंच निर्धारित बताई जा रही है, जबकि मौके पर लगभग 3 इंच मोटाई में ही निर्माण किए जाने की चर्चा है। यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो यह शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
पेटी ठेके में कराया जा रहा काम?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य को पेटी ठेके में देकर कराया जा रहा है, जिसके कारण गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा बनी हुई है।
तकनीकी निरीक्षण पर भी उठे सवाल
निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद प्रभावी तकनीकी निरीक्षण नजर नहीं आने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रशासन की अनदेखी है या फिर किसी प्रकार की मिलीभगत।
सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी
मामले की पारदर्शिता को लेकर एक स्थानीय जागरूक नागरिक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर पंचायत से नाली निर्माण से संबंधित तकनीकी प्राक्कलन, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी) और भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
एक माह बाद भी नहीं मिली जानकारी
सूचना का अधिकार के तहत आवेदन लगाए एक माह बीत जाने के बाद भी संबंधित विभाग द्वारा अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
व्यवस्था पर उठने लगे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सूचना का अधिकार के तहत भी समय सीमा में जानकारी नहीं दी जाती है तो इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर उचित कार्रवाई करता है या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।