वॉयस मॉड्यूलेशन व एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन पर श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला आयोजित
कुलपति प्रो. एन.के. जोशी बोले—प्रभावी संवाद कौशल से निखरता है शिक्षक का व्यक्तित्व और शिक्षण शैली
टिहरी | 13 मार्च 2026। केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “प्रभावी संप्रेषण के लिए वॉयस मॉड्यूलेशन एवं एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन” विषय पर एक फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों की संवाद क्षमता को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और आत्मविश्वासपूर्ण बनाना था, ताकि वे अपने विचारों और ज्ञान को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
संवाद कौशल शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार: कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे आयोजन भविष्य की शिक्षा और संप्रेषण की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में प्रभावी संवाद कौशल अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान के स्रोत ही नहीं, बल्कि प्रेरणा के माध्यम भी होते हैं, इसलिए उनकी अभिव्यक्ति स्पष्ट, प्रभावी और प्रेरणादायक होनी चाहिए। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को अपने व्यक्तित्व और शिक्षण शैली को और अधिक सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।
डिजिटल युग में संवाद कौशल की बढ़ी आवश्यकता
कार्यक्रम में फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक एवं गणित विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर ने कहा कि आज के डिजिटल और वैश्विक युग में प्रभावी संप्रेषण कौशल शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को स्पष्ट, प्रभावी और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, वेबिनार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और शोध प्रस्तुतियों में स्पष्ट उच्चारण, संतुलित आवाज और प्रभावी प्रस्तुति शैली अत्यंत उपयोगी होती है।
संवाद कौशल से मजबूत होती है शिक्षण प्रक्रिया
फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के उपनिदेशक डॉ. अटल बिहारी त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नए ज्ञान से परिचित कराने के साथ-साथ उनकी प्रस्तुति क्षमता और संवाद दक्षता को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावी संवाद कौशल आज शिक्षण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है।
विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ श्री विशाल वाल्के और श्री वेदांत जोशी ने प्रतिभागियों को वॉयस मॉड्यूलेशन, पिच, टोन, गति, श्वास तकनीक और एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने इंटरैक्टिव सत्रों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से बताया कि स्पष्ट उच्चारण और प्रभावी आवाज सार्वजनिक वक्तृत्व, शिक्षण और प्रस्तुति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रतिभागियों ने बताया उपयोगी और प्रेरणादायक
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. सीमा बैनिवाल ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को संवाद कौशल के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना और उन्हें अधिक आत्मविश्वासपूर्ण वक्ता बनाना है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के परिसर निदेशक प्रो. एम. एस. रावत, पूर्व डीन प्रो. कंचन लता सिन्हा, विभिन्न संकायों के डीन, शिक्षक, शोधार्थी और अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे। दिनभर चले सत्रों में प्रतिभागियों को संवाद कौशल के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।