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बदायूं: दिन में 'पकड़े' गए, रात में 'लड़खड़ा' गए! ये बदायूँ पुलिस का करिश्मा है साहब

बदायूं: दिन में 'पकड़े' गए, रात में 'लड़खड़ा' गए! ये बदायूँ पुलिस का करिश्मा है साहब! 🤔
इंसाफ' या 'स्क्रिप्ट'? बदायूँ डबल मर्डर का क्लाइमेक्स! 🎬🔥
दिन में अरेस्ट, रात में एनकाउंटर! बदायूँ पुलिस का "फास्ट ट्रैक" न्याय! ⚡️
एचपीसीएल के दो अफसरों की जान लेने वाले आरोपी 'मुडसैना के जंगल' में धराशायी हो गया। लोग कह रहे हैं कि पुलिस ने गिरफ्तारी तो पहले ही कर ली थी, फिर ये रात वाला ड्रामा कैसा?
​खैर, वजह जो भी हो, लेकिन अधिकारियों को तो राहत जरूर मिल गई होगी है।

अब ​लोग पूछ रहे हैं कि खेल कैसे हुआ? भाई, खेल तो बड़ा सीधा है! दोपहर में आरोपी पुलिस की गिरफ्त में था, और रात होते-होते 'निशांदेही' (हथियार ढूँढने) के चक्कर में पैरों में गोली खा बैठा।
​कहानी कुछ ऐसी है:
​दोपहर: "साहब, मैंने ही मारा है, चलिए हथियार बता देता हूँ।"
​रात का सन्नाटा: अचानक अभियुक्त को 'सुपरमैन' की शक्ति मिली, पुलिस पर गोली चलाई और फिर... 'ढांय-ढांय'!
​नतीजा: एक सिपाही घायल और आरोपी के दोनों पैरों में गोली।
​अब इसे इत्तेफाक कहें या यूपी पुलिस का 'स्पेशल ट्रीटमेंट', पर जनता तो यही कह रही है— "गिरफ्तारी दिन की, मुठभेड़ रात की... वाह रे पुलिस, तेरी करामात भी गजब की!" 👮‍♂️✨
अजब दास्तां है— गिरफ्तारी की खबरें दिन में ही उड़ने लगी थीं, लेकिन मुठभेड़ की 'शुभ घड़ी' रात में आई। मुडसैना के जंगलों में आरोपी ने भागने की कोशिश की या पुलिस ने उसे 'दौड़ना' सिखाया, ये तो जांच का विषय है। पर फिलहाल आरोपी अस्पताल के बिस्तर पर है और पुलिस की फाइल में 'मुठभेड़' दर्ज है।
​जनता का सवाल: ये मुठभेड़ असली थी या बस एक और 'पैर वाली गोली' का फॉर्मूला?
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