उत्तराखंड बजट सत्र में एलपीजी संकट पर हंगामा, सरकार की जवाबदेही पर उठे सवाल
भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के पांचवें दिन रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत को लेकर सदन के बाहर और भीतर तीखा विरोध देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अन्य मंत्री और विधायक जब सदन पहुंचे, उसी दौरान विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा की सीढ़ियों पर गैस सिलेंडर की तख्तियां लेकर धरना दिया और प्रदेश में गैस आपूर्ति की अव्यवस्था का आरोप लगाया।
विपक्ष का कहना है कि राज्य के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की कमी, कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आम लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं होटल, ढाबा और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी गैस सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने नियम 310 के तहत प्रदेश में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी का मुद्दा उठाया। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
भोजनावकाश के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर रोक लगाई है, हालांकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है।
सरकार के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और उसने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए विरोध जताया। विपक्ष का कहना है कि जब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नियम 310 के तहत चर्चा की अनुमति दी गई है, तो सरकार इस विषय पर बहस से क्यों बच रही है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश के कई हिस्सों में लोग गैस के लिए परेशान हैं, लेकिन सरकार इस समस्या को गंभीरता से लेने के बजाय जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के कारण सदन का माहौल गर्म हो गया, जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही लगभग 45 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
यह पूरा घटनाक्रम राज्य सरकार की प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। यदि प्रदेश में गैस की कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो केवल यह कह देना कि यह “केंद्र सरकार का विषय” है, समस्या से बचने जैसा प्रतीत होता है। जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें समय पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हों। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह वितरण व्यवस्था पर सख्त निगरानी रखे और कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।