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राजस्थान के रियां बड़ी पंचायत समिति के सथाना गांव की 49 वर्षीय चुका देवी व्यास हौसले और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल हैं

राजस्थान के रियां बड़ी पंचायत समिति के सथाना गांव की 49 वर्षीय चुका देवी व्यास हौसले और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल हैं, जो हर किसी को प्रेरित करती हैं। जन्म से उनके हाथ नहीं हैं, लेकिन इस कमी को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पिछले 35 वर्षों से वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में बच्चों की सेवा कर रही हैं और अपने पैरों के सहारे केंद्र का पूरा काम संभाल रही हैं।
चुका देवी बचपन से ही चुनौतियों के बीच पली-बढ़ीं। हाथ न होने के कारण जीवन के हर छोटे-बड़े काम में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पैरों को ही अपना सहारा बनाया और धीरे-धीरे लिखना, चीजें उठाना और रोजमर्रा के काम करना सीख लिया।
जब उन्होंने आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया, तब भी कई लोगों को शक था कि वह यह जिम्मेदारी कैसे निभा पाएंगी। लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सबको गलत साबित कर दिया। आज वह बच्चों को पढ़ाने, पोषण से जुड़ी गतिविधियां कराने और केंद्र से जुड़े सभी काम बड़ी जिम्मेदारी के साथ करती हैं।
चुका देवी अपने पैरों से रजिस्टर लिखती हैं, बच्चों के लिए जरूरी सामग्री तैयार करती हैं और केंद्र की व्यवस्था संभालती हैं। उनका कहना है कि अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी कमी उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
गांव के लोग भी उनके काम और हिम्मत की सराहना करते हैं। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
चुका देवी व्यास आज उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं। बिना हाथों के भी उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, आत्मविश्वास और हौसले के दम पर जीवन में बड़ी से बड़ी चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।
उनकी कहानी समाज को यह भी संदेश देती है कि मेहनत और आत्मसम्मान से जीवन जीना सबसे बड़ी ताकत है। जिनके पास सब कुछ होते हुए भी वे मेहनत से दूर भागते हैं, उनके लिए चुका देवी की जिंदगी एक मजबूत प्रेरणा है। ✨

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