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*राजधानी संपदा की जमीन पर ‘क्रिकेटीय’ खेल* *आपत्तियां फाइलों में कैद, पांच एकड़ जमीन सीधे एसोसिएशन के नाम*

*राजधानी संपदा की जमीन पर ‘क्रिकेटीय’ खेल*
*आपत्तियां फाइलों में कैद, पांच एकड़ जमीन सीधे एसोसिएशन के नाम*

✍️ लाल टोपी राजू सोनी, राजनांदगांव
राजनांदगांव में राजधानी संपदा की जमीन इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वजह है करीब पांच एकड़ जमीन का अचानक क्रिकेट एसोसिएशन के नाम आवंटन, और उससे भी ज्यादा चर्चा में है प्रशासनिक प्रक्रिया की वह “तेजी”, जो आम जनता के काम में शायद ही कभी दिखाई देती हो।
जानकार बताते हैं कि राजधानी संपदा की जमीन का यह मामला किसी क्रिकेट मैच से कम नहीं रहा। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मैदान पर बल्ला नहीं चला, बल्कि फाइलों में फैसले दौड़ते नजर आए।
पहले ही लगभग 10 एकड़ जमीन प्रेस क्लब राजनांदगांव को आवंटित की जा चुकी है। इसके बाद बची हुई करीब पांच एकड़ जमीन के लिए कुछ पत्रकार संगठनों और अन्य संस्थाओं ने भी दावा पेश किया था। नियम के मुताबिक तहसीलदार कार्यालय द्वारा आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
कुछ संगठनों और पत्रकारों ने बाकायदा लिखित आपत्तियां भी दर्ज कराईं। लेकिन प्रशासन की कार्यशैली भी कमाल की रही—आपत्तियां दर्ज हुईं, फाइल में रखी गईं और फिर शायद वहीं आराम करने चली गईं।
आरोप है कि बिना सुनवाई किए ही तहसीलदार और एसडीएम ने जमीन का आवंटन कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आपत्तियां दर्ज थीं तो उनकी सुनवाई किस मैदान में हुई—या फिर यह मैच “वॉकओवर” से ही खत्म कर दिया गया।
सूत्रों की मानें तो फाइल इतनी तेजी से दौड़ी कि कई लोगों को तो इसकी भनक भी तब लगी जब फैसला हो चुका था। यही वजह है कि शहर में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं इस “तेज रफ्तार प्रशासन” के पीछे कोई अदृश्य ताकत या अदृश्य लेन-देन तो नहीं था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
मामला और दिलचस्प तब हो गया जब इस पूरे घटनाक्रम के बाद संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का स्थानांतरण भी हो गया। अब शहर में लोग मजाक में कह रहे हैं—
“फैसला भी हो गया और खिलाड़ी भी पवेलियन लौट गए।”
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों को इस तरह नजरअंदाज किया जाएगा तो फिर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।
इस पूरे प्रकरण में क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री Raman Singh की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि इस मामले में कई बार हस्तक्षेप की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।
दिलचस्प बात यह भी है कि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि राजगामी संपदा के अध्यक्ष बनने के बाद ही इस जमीन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन विडंबना देखिए—अध्यक्ष का इंतजार किए बिना ही जमीन का फैसला कर दिया गया।
अब शहर में चर्चा यही है कि राजधानी संपदा की जमीन पर आखिर कानून का राज चला या किसी का दबाव।
राजनांदगांव की जनता और पत्रकार संगठन अब मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यह साफ हो सके कि यह जमीन नियमों से आवंटित हुई या फिर फाइलों के बीच कोई “छक्का” लग गया।

*लाल टोपी राजू सोनी*

Devashish Govind Tokekar
VANDE Bharat live tv news Nagpur
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
Indian Council of press,Nagpur
Journalist Cell
All India Media Association
Nagpur District President
Delhi Crime Press
RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
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Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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