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लोकसभा में गूंजी सिद्धार्थनगर की आवाज: जगदम्बिका पाल बोले- आर्थिक मजबूती और किसान कल्याण ही सरकार की प्राथमिकता"

सांसद जगदम्बिका पाल ने गुरुवार को लोकसभा में 2025-26 की द्वितीय अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार की आर्थिक नीति और संकट प्रबंधन क्षमता की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अनुदान का कुल आकार लगभग 2.81 लाख करोड़ रुपए है। इसमें करीब 2 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध नकद व्यय शामिल है। जबकि शेष राशि मंत्रालयों की बचत और बढ़ी हुई प्राप्तियों से पूरी की जाएगी।
जगदम्बिका पाल ने वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता का जिक्र किया, जो ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण 65-70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 88-119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
इस अस्थिरता ने उर्वरक गैस, खाद्यान्न परिवहन और निर्यात लागत को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक स्थिरीकरण कोष के माध्यम से भविष्य के भू-राजनीतिक झटकों से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने का कदम उठाया है।
सांसद ने भारत की आर्थिक प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था को अक्सर कमजोर माना जाता था, लेकिन अब देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग तीन गुना बढ़कर 357 लाख करोड़ रुपए हो गया है। साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। जगदम्बिका पाल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हासिल हुई आर्थिक स्थिरता और स्पष्ट नीति का परिणाम बताया।
कृषि क्षेत्र के संबंध में, जगदम्बिका पाल ने बताया कि सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। इससे लगभग 14 करोड़ किसानों को महंगे इनपुट के प्रभाव से राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी और यूरिया सब्सिडी योजनाओं के तहत किसानों को 19,230 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत देश के 81 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज दिया जा रहा है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है।
सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि राज्यों को 38,585 करोड़ रुपए का हस्तांतरण सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करेगा। यह राशि पंचायतों, शहरी निकायों, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायक होगी।
उन्होंने कहा कि यह अनुपूरक अनुदान केवल वित्तीय प्रावधान नहीं है, बल्कि "विकसित भारत 2047" के लक्ष्य की दिशा में आर्थिक स्थिरता, किसान सशक्तिकरण और गरीब कल्याण की नीति का स्पष्ट संकेत है।

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