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मऊशिवाला का एमआरएफ सेंटर प्रतिदिन करेगा 10 टन कूड़ा निस्तारण


मऊशिवाला का एमआरएफ सेंटर प्रतिदिन करेगा 10 टन कूड़ा निस्तारण



चिंतन संस्था करेगी संचालन, महापौर ने समारोहपूर्वक किया उद्घाटन

चार वार्डों का कूड़ा आगमन शुरू, चिंतन की ओर से 14 कर्मचारी तैनात


अयोध्या



कूड़ा निस्तारण कर नगर को स्वच्छ बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक और बड़ा कदम उठाया है। स्वयंसेवी संस्था चिंतन की ओर से मऊशिवाला में स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) का पुनर्विकास कर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई ऊंचाई प्रदान की गई है। चिंतन एनवायरमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप, नगर निगम अयोध्या के सहयोग से एसबीआई फाउंडेशन के सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत स्थापित इस इकाई का उद्घाटन महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने समारोहपूर्वक किया। इस दौरान अपर नगर आयुक्त भारत भार्गव, सहायक नगर आयुक्त गुरु प्रसाद पांडेय, एसबीआई फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक स्वप्न धर, रितेश सेन मुस्कान शर्मा, चिंतन संस्था की ओर से संस्थापक एवं निदेशक भारती चतुर्वेदी, अपूर्व अग्रवाल, मोहित गर्ग, आलोक सिंह राणा, एकता भटनागर, विमल कुमार, विनय कुमार उपस्थित रहे। महापौर ने इस मौके पर उम्मीद जताई कि चिंतन एवं एसबीआई फाउंडेशन की इस पहल से ठोस अपशिष्ट पदार्थ के प्रबंधन में आसानी होगी और नगर स्वच्छता रैंकिंग के उच्चतम शिखर की ओर बढ़ेगा। उन्होंने एसबीआईएफ के नारे 'वेस्ट नो मोर इन अयोध्या' को सार्थक बनाने के लिए जन सहयोग की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यह केंद्र आने वाले समय में अन्य शहरों के लिए प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर सकता है। इससे अयोध्या को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में सफलता मिलेगी।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडेय ने बताया मऊशिवाला में स्थापित एमआरएफ नगर निगम के चार वार्डों शिवनगर, चित्रगुप्तनगर, कृष्णानगर और लाला लाजपत राय नगर से एकत्रित कचरे का निस्तारण एवं प्रबंधन करेगा। इससे प्लास्टिक, कागज एवं अन्य पुनर्चक्रण योग्य संसाधनों की को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त घरों से एकत्रित गीले कचरे का कम्पोस्टिंग के माध्यम से प्रसंस्करण कर जैविक खाद (कंपोस्ट) तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग पौधारोपण और नगर क्षेत्र में हरियाली लाने के लिए किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र के माध्यम से प्रतिदिन 10 टन कूड़ा का निस्तारण किया जा सकेगा। चिंतन संस्था ने इसके लिए 14 कर्मचारियों की तैनाती की है। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से हर वर्ष साढ़े आठ लाख किलोग्राम कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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