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बिजनौर की राजनीति में संजय सिंह चौहान की छवि आज भी जीवंत

नई दिल्ली/बिजनौर। जनसरोकारों की राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व सांसद संजय सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र की जनता के साथ गहरा और आत्मीय रिश्ता कायम किया। वर्ष 2009 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने संसद में ग्रामीण विकास, कृषि तथा किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी सक्रियता और जनहित के विषयों पर स्पष्ट दृष्टिकोण के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी सम्मान के साथ देखा जाता रहा।

संजय सिंह चौहान का जन्म 10 अक्तूबर 1961 को हुआ था। वे उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चौधरी नारायण सिंह के पुत्र थे। राजनीतिक विरासत मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी पहचान स्वयं के कार्यों और जनता के बीच निरंतर सक्रियता के माध्यम से बनाई। उनका स्वभाव अत्यंत सरल, सहज और मिलनसार था, जिसके कारण वे गांव-गांव में लोकप्रिय रहे और लोगों के दिलों में विशेष स्थान बना सके।

अपने संसदीय कार्यकाल में उन्होंने किसानों की समस्याओं, सिंचाई व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, सड़क निर्माण तथा ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास जैसे विषयों को प्राथमिकता दी। बिजनौर जैसे बहुजातीय और ग्रामीण बहुल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई। जनता के बीच वे ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे, जिनके द्वार आम लोगों के लिए सदैव खुले रहते थे।

वर्ष 2014 में उनके निधन के बाद भी उनकी कार्यशैली और जनसेवा की भावना लोगों के मन में आज भी जीवित है। उनके पुत्र चंदन चौहान वर्तमान में उसी राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि चंदन चौहान में भी अपने पिता जैसी सादगी, विनम्रता और जनता के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

संजय सिंह चौहान का जीवन यह सिद्ध करता है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसकी सेवा भावना, ईमानदारी और समर्पण से होती है। यही कारण है कि बिजनौर ही नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में भी उनका योगदान आज सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है।

✍🏻 ऋषभ पराशर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMA मीडिया युवा प्रकोष्ठ।

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