जिस सिरप को एक सरकारी स्तर पर लगभग ₹11 में खरीदा गया, वही दवा दूसरे स्तर पर ₹80 में खरीदी जा रही है
खोखला होता विभाग।
जिस सिरप को एक सरकारी स्तर पर लगभग ₹11 में खरीदा गया, वही दवा दूसरे स्तर पर ₹80 में खरीदी जा रही है, तो साफ है कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी या मिलीभगत जरूर है। दवाइयों जैसी जरूरी चीज़ में इस तरह की अनियमितता सीधे-सीधे जनता के स्वास्थ्य और सरकारी पैसे दोनों के साथ खिलवाड़ है।
सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत जरूरी है, क्योंकि यहाँ खर्च होने वाला हर रुपया जनता के टैक्स का पैसा होता है। अगर खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है या किसी ने पद का दुरुपयोग किया है तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।
जनता को सिर्फ इतना चाहिए कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील व्यवस्था में ईमानदारी और पारदर्शिता बनी रहे, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही मायने में लोगों तक पहुंचे और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लग सके।